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Wednesday, December 2, 2009

कुम्हारिया में 2012 में शुरू होगा उत्पादन

न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन आफ इंडिया का विशेष दल हरियाणा पहुंचा
700-700 मेगावाट की चार इकाइयां स्थापित होंगी
Nuclear Power Corporation of India (NPCIL) ने फतेहाबाद के कुम्हारिया में न्यूक्लियर पावर परियोजना स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और 2012 में इसकी प्रथम व द्वितीय इकाइयां काम करना शुरू कर देंगी। इस संबंध में न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक डा. एसके जैन के नेतृत्व में निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का दल हरियाणा पहुंच चुका है। दल ने बुधवार को चंडीगढ़ में हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली बैठक की। यह दल नई दिल्ली में शुक्रवार को मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से भी भेंट करेंगे। इससे पूर्व वह कुम्हारिया का दौरा करेंगे। बैठक की अध्यक्षता वित्त विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव अजीत एम शरण ने की। इस परमाणु ऊर्जा केंद्र में 700-700 मेगावाट की चार इकाइयां स्थापित की जाएंगी और केंद्र की कुल क्षमता 2800 मेगावाट होगी। न्यक्लियर पावर कारपोरेशन की टीम बृहस्पतिवार को क्षेत्र का दौरा करेगी और उसके बाद हरियाणा सरकार जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई को आगे बढ़ा पाएगी।सूत्रों के अनुसार हरियाणा सरकार इस प्लांट के लिए जमीन का दायरा कम करने की तैयारी कर रही है। इससे पूर्व 2471 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की बात की जा रही थी, लेकिन अब मात्र 1100 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने पर विचार चल रहा है। प्रदेश सरकार का मानना है कि इससे प्लांट का विरोध कम होगा और अधिग्रहण की कार्रवाई को जल्द सिरे चढ़ाया जा सकेगा।एनपीसीआईएल के एमडी जैन ने दावा किया है कि कुम्हारिया में प्रदूषण रहित एक ग्रीन प्रोजेक्ट होगा और जिसके रेडिएशन से भी स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।डा. एस के जैन ने कहा कि यह परियोजना भारी पानी के दवाब की स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगी। एनपीसीआईएल ने 17 न्यूक्लियर पावर परियोजनाएं स्थापित की हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010-11 तक या 2012 से पूर्व इस पूर्व-परियोजना का कार्य पूरा हो जाएगा। प्रथम और द्वितीय इकाई का निर्माण मार्च 2012 तक आरंभ हो जाएगा। तीसरी और चौथी इकाई का कार्य लगभग तीन या चार वर्षों उपरांत शुरू होगा। प्रोजेक्ट से उत्पादित बिजली का शुल्क लगभग 2.7 रुपये प्रति यूनिट होगा, जो देश में कोयला आधारित संयत्रों से उत्पादित बिजली की वर्तमान दर से बहुत सस्ती होगी। डा. जैन ने बताया कि निगम द्वारा चिकित्सा सुविधा और एक टाउनशिप के अतिरिक्त एक सीबीएसई स्कूल की भी स्थापना की जाएगी। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार और गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार में न्यूक्लियर टैक्रोलोजी में परियोजना शुरू करने के लिए एनपीसीआईएल की सहायता की भी उन्होंने पेशकश की है। बैठक में बिजली विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव मधुसूदन प्रसाद, बिजली निगमों के प्रबंध निदेशक ले. जनरल (सेवानिवृत) ओ एस लोहचब तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

Saturday, November 28, 2009

हजारों साल पुरानी संस्कृति का साक्षी Banawali

फतेहाबाद-गांव नागपुर संपर्क मार्ग पर बसा गांव बनावली का किला अपने अंदर करीब पांच हजार वर्ष पुरानी हड़प्पा संस्कृति का इतिहास समेटे हुए है। खुदाई के दौरान ऐतिहासिक किले में दबी हड़प्पा संस्कृति (2600-2400 ईपू) के तीनों कालों के लोगों के रहन-सहन, खान पान, धार्मिक मान्यताओं व अन्य सभी प्रकार की जानकारियां मिलती हैं। करीब 32 एकड़ क्षेत्र में फैली इस प्राचीन धरोहर की पहचान 1960 के आसपास हुई तथा 1974 से 1988 तक यहां खुदाई का कार्य किया गया। अब इस ऐतिहासिक धरोहर को संजोने के लिए बनावली को विश्व धरोहर में शामिल करने का प्रस्ताव यूनेस्को के पास भेजने का निर्णय किया गया है। अगर यह योजना सिरे चढ़ती है तो निश्चित तौर पर इतिहास की इस महत्वपूर्ण कड़ी को सहेजकर रखा जा सकेगा। खुदाई के दौरान मिली ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं से हड़प्पाकालीन सभ्यता की बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिल पाई।
1988 के बाद यहां अभी तक किसी प्रकार की खुदाई नहीं हुई है। यहां सबसे पहले हरियाणा पुरातत्व विभाग ने 1974 में खुदाई की तथा 1977 तक समय-समय पर यह कार्य किया जाता रहा। इसमें उसे कुछ विशेष हाथ नहीं लगा। इसके बाद भारतीय पुरातत्व विभाग ने 1977 में इसकी खुदाई का कार्य अपने हाथों में लिया। इससे इस स्थान के हड़प्पाकालीन सभ्यता से जुड़े होने का निष्कर्ष निकाला गया। भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे 4 सितंबर 1982 को अपने कब्जे में लिया और 1988 तक खुदाई का काम जारी रखा। खुदाई के दौरान मिले शहर के किले का मुख्य गेट पक्की र्इंटों से तथा अन्य पूरा हिस्सा कच्ची ईटों से बना है। करीब 32 एकड़ में फैले इस पुरातत्व महत्व के किले पर फिलहाल करीब 12 एकड़ भूमि पर ही विभाग का कब्जा है। जबकि करीब 24 एकड़ जमीन पर किसानों द्वारा खेती की जा रही है।

इतिहासकार डा. मुनीष नागपाल ने कहा कि यदि इसे विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है तो इससे आने वाली पीढि़यों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। इसी प्रकार से डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि यदि ऐसा हो पाया तो इसे संग्रहित करने के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था हो पाएगी। इतिहासकार डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि ऐसा होने से विश्व में बनावाली के साथ-साथ जिला व प्रदेश का नाम भी रोशन होगा। महानगरीय संस्कृति थी बनावली.. वस्तुओं की चूडि़यां भी पहनती थीं। इस क्षेत्र से टेरोकोटा, स्पायरल कापर हेयर-पिन, देवियों की मूर्तियां आदि भी मिले हैं।

कहां-कहां मिले हैं ऐसे स्थान
करीब पांच साल पुरानी इस सभ्यता के इससे मिलते जुलते अवशेष हिसार जिले के गांव राखी, गुजरात के लोथल व राजस्थान के कालीभंगा में भी पाए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि हड़प्पा संस्कृति उत्तर भारत से होती हुई अफगानिस्तान व पाकिस्तान तक फैली हुई थी। हड़प्पा सभ्यता के लोग नगरों में रहते थे। जिनकी गलियां आर-पार गुजरती थीं। इसी प्रकार इस सभ्यता में बनाए गए मकान भी आरपार होते थे।
क्या-क्या मिला खुदाई में
विभाग को खुदाई के दौरान अंडाकार तथा गोलाकार चूल्हों से लैस सुनियोजित ढंग से बनाए गए मकान, कांच से बने मर्तबान तथा कलश, परात, प्यालियां, कुठार, जार, सोने के मुकने, मूल्यवान पत्थर, मृदभांड, छेलखड़ी, मिट्टी की चूडि़यां, शंख व तांबा सहित अनेक वस्तुएं मिलीं। इसके अलावा जानवरों एवं फूलों के चित्रों बने हुए खाना खाने व पकाने के हांडी बीकर, परात, पानपात्र, एस आकार के जार, ईट, चर्ट ब्लेड, हाथी दांत व हड्डियों के खिलौने, सोने तथा मूल्यवान पत्थरों के मनके, सोने की पत्ती चढे़ तांबे के आभूषण, मिट्टी से बनी जानवरों की आकृतियां, अभिलेख युक्त मुद्रा तथा मुद्रिकाएं आदि के अवशेष मिले। इसके अलावा जौ के जले अवशेष व मनकों की फैक्टरी भी मिली है।

Saturday, April 4, 2009

Punjab Police ने डेरा प्रेमियों के साथ की मारपीट!

Fatehabad के चूडलकला में उत्पन्न हुए विवाद में नामजद डेराप्रेमियों से पंजाब पुलिस द्वारा कथित तौर पर मारपीट की। घायल डेरा प्रेमियों को जाखल के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जाखल के सरकारी अस्पताल में दाखिल वीरपाल कौर पत्नी रामचंद ने बताया कि बीती रात दो गाड़ियों सवार हो कर आए पंजाब पुलिस के कर्मचारियों ने उनके घर पर आ कर उसके ससुर से उसके देवर के बारे में पूछताछ की। उसके देवर के घर पर न होने की बात पर नशे में चूर पंजाब पुलिस कर्मचारियों ने उसके ससुर को जबरन उठा कर जीप में डाल लिया। शोरशराबा होने पर उसने व अन्य डेरा प्रेमियों ने पुलिस कर्मचारियों को रोका तो पुलिस कर्मचारियों ने उसे ,उसके ससुर व अन्य डेरा प्रेमियों से मारपीट की। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के कपडे़ भी फाड़ दिए। भारी संख्या में डेरा प्रेमियों को इकट्ठे होने पर पंजाब पुलिस कर्मचारी भाग गए। घायल डेरा प्रेमियों को जाखल के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया।
पंजाब पुलिस चोटिया चौकी इंचार्ज सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि इस मामले में नामित व्यक्तियो को काबू करने के लिए अदालत से वारंट लिये हुए है। इसी कड़ी के चलते उन्होंने गाव चांदपुरा में नामित व्यक्ति के निवास पर हरियाणा पुलिस के कर्मचारी को साथ ले कर दबिश दी थी। लेकिन उसके घर पर न मिलने पर वे वापस आ गये। वहा पर किसी भी कर्मचारी ने किसी से कोई मारपीट नहीं की है और न ही अभद्र व्यवहार किया है। डेरा प्रेमियों ने पुलिस पर जो आरोप लगाये है वो निराधार है। ये तो सिर्फ डेरा प्रेमियों की मनघड़ंत कहानी घड़ी है। जाखल के सरकारी अस्पताल में कार्यरत डाक्टर दीपक गोयल ने बताया कि गाव चादपुरा निवासी राम चन्द्र बीती देर रात्रि एक महिला व दो व्यक्तियों को इलाज के लिए लाया था। जिन का प्राथमिक उपचार कर दिया है। शरीर में लगी गुम चोटों की जानकारी एक्सरे उपरांत की लगेगी। जाखल थाना प्रभारी रामकिशन से बात की तो उन्होंने बताया कि डेरा प्रेमियों व सिख समुदाय के बीच नामचर्चा को ले कर हुए विवाद में पंजाब पुलिस ने दोनो पक्षों के लोगों पर मामले दर्ज किए हुए है तथा नामित डेरा प्रेमियों को हरियाणा प्रदेश में काबू करने के लिए दबिश दी जा रही है। दबिश के दौरान हरियाणा पुलिस के कर्मचारी को साथ लिया जाता है। बीती रात गाव चांदपुरा में दबिश दी गई थी। उन्हे मारपीट के मामले की जानकारी मिली है, पुलिस इस की गहनता से जांच कर रही है।

Monday, March 16, 2009

फिर भिड़े डेरा प्रेमी व सिख

डेरा प्रेमियों व सिखों के बीच विवाद की चिंगारी रविवार को फिर भड़क उठी। जाखल के नजदीक पंजाब में पड़ने वाले गांव चूडल कलां में नामचर्चा को लेकर डेरा प्रेमी व सिख श्रद्धालु भिड़ गए और दोनों के बीच जमकर पथराव हुआ। विवाद को रोकने के लिए पुलिस को हलका बल प्रयोग करना पड़ा। बाद में पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में नामचर्चा संपन्न हो गई।
पंजाब में दो वर्षो से नामचर्चा पर लगी पाबंदी एक माह पूर्व हटा ली गई थी। साध संगत ने गांव चूडल कलां में नामचर्चा का आयोजन किया। रविवार सुबह से ही नामचर्चा घर पर साध संगत का पहुंचना शुरू हो गया। इसकी सूचना मिलते ही पंजाब पुलिस के कान खड़े हो गए और तत्काल भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। जाखल बरेटा मार्ग पर पुलिस चौकसी को बढ़ाते हुए जगह जगह पर नाके लगा दिए गए। वाहनों की आवाजाही भी रोक दी गई। हरियाणा सीमा की ओर से डेरा प्रेमियों का सैलाब नामचर्चा घर की ओर उमड़ने लगा तो पंजाब पुलिस उन्हें रोकने लगी। इससे से तलवाड़ा रेलवे फाटक के नजदीक डेरा प्रेमियों व पंजाब पुलिस के बीच काफी तकरार हुई। पुलिस कर्मचारी डेरा प्रेमियों को नामचर्चा घर जाने से नहीं रोक सके। दूसरी तरफ इसकी खबर ही सिख समुदाय के लोग भी चूडल कलां स्थित गुरुद्वारा घर में एकत्र होने लगे। पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सिख श्रद्धालु नामचर्चा घर की ओर बढ़ने लगे। उन्हें रोकने की पुलिस की कोशिश नाकाम रही। सिख श्रद्धालु नामचर्चा घर की ओर पिछवाडे़ से बढ़े तो वहां पहले से ही डेरा प्रेमी मौजूद थे। दोनों पक्षों ने एक दूसरे को ललकारना शुरू कर दिया और पत्थर बरसाने लगे। टकराव रोकने की कोशिश नाकाम देख आखिर पुलिस कर्मचारियों ने डेरा प्रेमियों पर हल्का लाठीचार्ज किया। इससे गुस्साए डेरा प्रेमी पत्थर बरसाने लगे जिससे छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। भारी मशक्कत के बाद पुलिस ने दोनों समुदाय के श्रद्धालुओं को काबू किया। गुस्साए सिख जाखल बरेटा मार्ग के बीचों बीच बैठ गए। पुलिस प्रशासन ने पुलिस बल को तैनात करने करने के साथ ही दंगा निरोधक दस्ते को भी नामचर्चा घर के बाहर तैनात कर दिया।

Wednesday, February 4, 2009

स्टाफ की कमी के खिलाफ छात्रों की गांधीगिरी

Fatehabad के ढाणी लाम्बा के सरकारी स्कूल में अध्यापकों की कमी के चलते स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे सभी 135 बच्चे सामूहिक अवकाश पर चले गए। साथ में उन्होंने यह घोषणा की कि यदि शीघ्र ही अध्यापकों की कमी को पूरा नहीं किया गया तो स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चे स्कूल छोड़कर घर बैठ जाएंगे। अभिभावकों ने भी छात्रों की मांग का समर्थन करते हुए उन्हें पूर्ण सहयोग देने का ऐलान कर दिया है। ज्ञात रहे गांव ढाणी लाम्बा के स्कूल में क्फ्भ् छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे है। शिक्षा विभाग द्वारा यहां दो शिक्षकों नियुक्त किए हुए है। इसके बावजूद दो में से एक शिक्षक को डेपुटेशन पर गांव नथवाला के स्कूल में भेज दिया गया। विभाग की इस कार्रवाई से सभी बच्चों को पढ़ाने व स्कूल के अन्य काम निपटाने का पूरा जिम्मा एक ही शिक्षक के कंधों पर है।
अभी तक पूरा नहीं हुआ सिलेबस
शिक्षा बोर्ड द्वारा भले ही प्रदेश में वार्षिक परीक्षाओं की घोषणा कर दी गई हो तथा कुछ कक्षाओं की परीक्षाएं तो अगले सप्ताह शुरू भी होने वाली है। ऐसे में जब बच्चों को अभी तक पूरा सिलेबस पढ़ाया ही नहीं गया है, तो वे वार्षिक परीक्षा में क्या लिखेंगे। इस बारे में गांव के सरपंच नवनीत राय ने कहा कि इस बारे में गांव की पंचायत कई बार अधिकारियों को अवगत करवा चुकी है। परंतु अधिकारियों ने पंचायत की बात की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। इस बारे में खंड शिक्षा अधिकारी ओपी रावल ने कहा कि डेपुटेशन पर गए शिक्षक को शीघ्र ही उसके मूल स्थान पर भेज दिया जाएगा। इसके अलावा आवश्यकता के अनुसार नए शिक्षकों की भी नियुक्ति की जाएगी।