Saturday, November 7, 2009

Ministers Taking Oath

Captain Ajay Yadav taking oath as Cabinet Minister.
कैप्टन अजय यादव : वित्त, योजना, संस्थागत वित्त एवं ऋण नियंत्रण, सिंचाई, वन एवं पर्यावरण।

Randeep Surjewala after taking oath as Cabinet Minister.
रणदीप सिंह सुरजेवाला : जल आपूर्ति एवं स्च्छता, संसदीय मामले, इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना तकनीक, विज्ञान एवं तकनीक और लोक निर्माण।
OP Jain after taking oath as Cabinet Minister.
ओमप्रकाश जैन : परिवहन, पर्यटन, नागरिक उड्डयन व आतिथ्य।
Mahender Pratap Singh after taking oath as Cabinet Minister.
महेंद्र प्रताप सिंह : ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, श्रम एवं रोजगार, खाद्य एवं आपूर्ति, शहरी स्थानीय निकाय और उद्योग एवं वाणिज्य।
Geeta Bhukkal with family members after taking oath as Cabinet Minister.
गीता भुक्कल : शिक्षा एवं भाषा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, महिला एवं बाल विकास, अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्गों का कल्याण, स्वास्थ्य, प्रिंटिंग एवं स्टेशनरी।
परमवीर सिंह : कृषि, पशुपालन और डेयरी, मत्स्य और सहयोग।
ShivCharan Lal Sharma after taking oath as State Minister.
शिवचरण लाल शर्मा : राजस्व एवं आपदा प्रबंधन (मुख्यमंत्री से जुड़ा हुआ), एकीकरण एवं पुनर्वास।
Gopal Kanda after taking oath as State Minister.
गोपाल कांडा : खेलकूद एवं युवा मामले, उद्योग एवं वाणिज्य (मंत्री से जुड़ा)
सुखबीर कटारिया : कृषि एवं सहयोग (वह कैबिनेट मंत्री से जुड़े रहेंगे)।

Parliament sectretaries taking oath

Sharda Rathaur taking oath as Chief parliamentry secretary.
Anita Yadav taking oath as Chief parliamentry secretary.
Ramkishan Fauji taking oath as parliamentry secretary.
Sultan Singh taking oath as parliamentry secretary.
Jaleb Khan taking oath as parliamentry secretary.
Chief Parliament Secretaries and Parliament Secretaries with CM

Wednesday, October 28, 2009

हुड्डा ने पास की अग्निपरीक्षा

सात निर्दलीय विधायकों व एक बसपा विधायक के सहारे बुधवार को कांग्रेस ने सदन में अपना बहुमत साबित कर दिया। 90 सदस्यीय विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा रखे गए विश्वास प्रस्ताव को 47 विधायकों ने पहले तो ध्वनिमत से फिर मांग आने पर खड़े होकर अपना समर्थन दिया। इस तरह हुड्डा ने अपनी पहली अग्नि परीक्षा पास कर ली है।

इधर हजकां के छह विधायक शपथ लेने के बाद विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव के बीच सदन से चले गए और लौट कर नहीं आए। यानि विश्वास मत के दौरान वे सदन में नहीं थे। हजकां विधायक दल के नेता कुलदीप बिश्नोई ने फोन पर बताया कि अभी हमारे सभी विकल्प खुले है। हम सरकार को भी समर्थन कर सकते है, इनेलो को भी और विपक्ष में भी बैठ सकते है। उन्होंने कहा कि समर्थन देने की हमारी कोई शर्त नहीं है हम केवल चाहते है कि जो वायदे चुनाव में हमने जनता से किए हैं वे पूरे हों।
विधानसभा चुनाव में कांग्र्रेस को 40, इनेलो-अकाली दल को 32, हजकां को छह, भाजपा को चार, निर्दलीय सात और बसपा को एक सीट मिली थी। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में बहुमत के लिए 46 विधायकों का साथ चाहिए, क्योंकि चौटाला दो सीटों से जीते थे इसलिए सदन 89 सदस्यों का रह जाता है। इसलिए बहुमत के लिए 45 विधायक चाहिए थे, पर कांग्रेस ने 47 विधायकों के साथ बहुमत पेश कर दिया। राज्यपाल ने बड़ा दल होने के नाते कांग्रेस को बहुमत साबित करने के लिए सप्ताह का वक्त दिया था।
वैसे जरूरत पड़ती तो विधानसभा अध्यक्ष हरमोहिंदर सिंह चïट्ठा भी कांग्रेस के पक्ष में वोट कर सकते थे। इस प्रकार कांग्रेस के पास इस समय 48 का आंकड़ा है। विश्वास मत पर इनेलो विधायक दल और सत्ता पक्ष के बीच करीब एक घंटा बहस चलती रही। बीच-बीच में भाजपा के अनिल विज व कृष्णपाल गुज्जर भी बोलते रहे। शोर शराबे में विश्वास मत पर बहस नहीं हो पाई। आखिर में वोटिंग हो गई। चौटाला और भाजपा सदन को और दो-तीन दिन चलाने की मांग कर रहे थे। अंत में चौटाला ने वाटिंग की मांग की और उसे स्वीकार कर लिया गया।
कौन-कौन हैं साथ
कांग्रेस के 40 विधायकों के अलावा निर्दलीय विधायक प्रह्लïाद सिंह गिल्ला खेड़ा, गोपाल कांडा, सुखबीर कटारिया, जलेब खान, ओम प्रकाश जैन, सुलतान जडौला, शिवचरण शर्मा और बसपा विधायक अकरम खान ने सरकार के पक्ष में मतदान किया।


Sunday, October 25, 2009

हरियाणा के मुख्यमंत्री और उनके कार्यकाल

पं. भगवत दयाल शर्मा



01.11.1966 से 23.03.1967
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राव बीरेंद्र सिंह


24.03.1967 से 20.11.1967
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बंसी लाल
1. 22.05.1968 से 30.11.1975
2. 05.07.1985 से 19.06.1987
3. 11-05.1996 से 23.07.1999
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बनारसी दास गुप्ता


1. 01.12.1975 से 30.04.1977
2. 22.05.1990 से 12.07.1990
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चौधरी देवीलाल

1. 21.06.1977 से 28.06.1979
2. 17.07.1987 से 02.12.1989
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चौधरी भजनलाल

1. 29.06.1979 से 05.07.1985
2. 23.07.1991 से 09.05.1996
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ओमप्रकाश चौटाला

1. 02.12.1989 से 22.05.1990
2. 12.07.1990 से 17.07.1990
3. 24.07.1999 से 04.03.2005
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हुकम सिंह


1. 17.07.1990 से 21.03.1991
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा

1. 05.03.2005 से 25.10.2009
2. 25.10.2009 से शुरू

Hooda ने बनाया नया रिकॉर्ड

सीएम की कुर्सी या कांटों का ताज
भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सिर पर दूसरी बार मुख्यमंत्री का ताज रखा गया। राज्यपाल जगन्नाथ पहाडिय़ा ने रविवार शाम उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। उन्हें बहुमत साबित करने के लिए सात दिन का वक्त दिया गया है। पर इस बार मुख्यमंत्री की कुर्सी किसी कांटों के ताज से कम नहीं है। निर्दलियों के समर्थन से चलने वाली अल्पमत सरकार को घेरने का विपक्ष कोई मौका नहीं चूकेगा। वहीं सहयोगी दलों से तालमेल बनाए रखना भी हुड्डा के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। नवनिर्वाचित विधानसभा का पहला सत्र 28 व 29 अक्टूबर को होगा, जिसमें हुड्डा बहुमत साबित करेंगे। इसी बीच हजकां ने भी सरकार को समर्थन देने का फैसला कर लिया है। समर्थन की शर्तें क्या होंगी यह अभी तय नहीं हैं।
रविवार को राज्यपाल जगन्नाथ पहाडिय़ा ने हरियाणा राजभवन में आयोजित समारोह में भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्यमंत्री के पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। हुड्डा ने कांग्रेस पार्टी के तीन केंद्रीय पर्यवेक्षकों, हरियाणा मामलों के प्रभारी एवं प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, कांग्रेस के महासचिव बीके हरि प्रसाद और मोहसिना किदवई की उपस्थिति में हिंदी में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।
सात निर्दलियों व बसपा के एक विधायक के बाद हजकां के समर्थन से सरकार को कुछ स्थायीत्व मिल गया है। शपथ ग्रहण समारोह में हुड्डा ने अकेले शपथ ग्रहण की। कहा जा रहा है कि आलाकमान से विचार-विमर्श के बाद वह जल्द ही अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। इसके अलावा कांग्रेस के सभी गुटों को खुश करने और हजकां और निर्दलियों को भी संतुष्ट करना भी चुनौती से कम नहीं है। प्रदेश में कुल 14 मंत्री बन सकते हैं और सभी निर्दलीय मंत्री पद पाने की जोड़-तोड़ में हैं। इनेलो के संपर्क में पूर्व से रहे तीन निर्दलियों को तो पहले विस्तार में मंत्री पद हर हाल में देना ही होगा। इसके अलावा रोहतक, झज्जर व सोनीपत से बाहर अपने प्रभाव का विस्तार करना भी हुड्डा के लिए चुनौती से कम नहीं है। इन चुनावों में एक बार फिर हुड्डा और कांग्रेस इन्हीं जिलों में सिमटते नजर आए।

Tuesday, August 25, 2009

हजकां बीएसपी में सीट तालमेल

इनेलो -बीजेपी गठबंधन का हश्र देख आनन-फानन में हरियाणा जनहित कांग्रेस और बसपा ने मंगलवार को विधानसभा चुनाव की सीटों का बंटवारा कर लिया। जिस तरह से गठबंधन की घोषणा के बाद से सीटों के तालमेल का मामला अटका था, इस गठबंधन पर ही सवाल उठने लगे थे हालाँकि दोनों दलों ने सीटों के बंटवारे की घोषणा कर यह जताने का प्रयास किया है की उनके यहाँ सब ठीक है लेकिन Barwala और बवानी खेडा पर जिस तरह टकराव की नौबत आई उसने करार की कामयाबी पर ही सवाल खड़े कर दिए भिवानी, हिसार में एक भी रिज़र्व सीट बीएसपी के कोटे में नही गई इसका नतीजा यह हुआ की बीएसपी का बेस कैडर ही समझौते से स्वयं को ठगा महसूस करने लगा


अनुशासन के डंडे या पार्टी के प्रति वफादारी ने भले ही उन्हें अब चुप करा दिया हो और हजकां को इसमें जीत नज़र रही हो लेकिन चुनाव में इनकी निष्क्रियता जीत की राह को दूभर कर सकती है हिसार और कुरुक्षेत्र में बीएसपी के कुछ सीनियर नेताओं के ख़िलाफ़ जो चिंगारी उठी थी, उसे भले ही अभी दबा दिया हो, लेकिन कमजोर सीटें लेने के कार्यकर्ताओं के आरोप गठबंधन के जोश को ठंडा कर ही रहे हैं। आरोप टो यह भी है की लोकसभा चुनाव में हजकां हिसार और भिवानी में बढ़त बनती दिखी और इसी के दम पर हजकां ने बीएसपी को इन जिलों में जमकर रूलाया और जान बूझकर उन्हें कमजोर सीटें दी


बहरहाल दोनों दल सीट बंटवारे पर राजी हो गए हैं। इसके अलावा गठबंधन की 20 सितंबर को जींद में रैली करने की घोषणा की गई है, जिसकी मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती होंगी और अध्यक्षता हजकां के संरक्षक पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल करेंगे। चंडीगढ़ में हजकां सुप्रीमो कुलदीप बिश्नोई और बसपा के प्रदेश प्रभारी मान सिंह मनहेड़ा ने प्रेस सम्मेलन करके चंडीगढ़ में सीटों के बंटवारे का एलान किया। गठबंधन के नियम के मुताबिक हजकां के हिस्से 50 और बसपा के हिस्से 40 सीटें आई हैं। दस आरक्षित सीटों पर बसपा के प्रत्याशी होंगे, जबकि सात आरक्षित सीटों पर हजकां के प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। इस अवसर पर बसपा प्रदेशाध्यक्ष प्रकाश भारती भी मौजूद थे। लेकिन उनकी अधिकांश समय चुप्पी यह बता रही थी की कार्यकर्ताओं का उन पर कितना दबाव है। कुलदीप और मनहेडा जब एक दूसरे को गलबहियां कर रहे थे , विरोधी भारती एक तरफ़ खड़े मुस्कुराने की कोशिश कर रहे थे गठबंधन में दोनों दलों ने कुछ समझौते भी किए। लोकसभा चुनाव में करनाल संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली इंद्री सीट पर बसपा प्रत्याशी जीता था पर यह सीट हजकां को दे दी गई, क्योंकि यहां पर हजकां के युवा नेता पूर्व विधायक राकेश कांबोज को चुनाव लड़ना है। हिसार संसदीय सीट के तहत बरवाला विधानसभा सीट पर हजकां प्रत्याशी ने विजय हासिल की थी, यह सीट बसपा को दे दी गई। इस सीट पर बसपा बलवान सिंह जांगड़ा को प्रत्याशी बनाएगी।
आर्य के लिए यह चुनौती आसान नहीं। जांगडा को बरवाला सीट मिल गई पर एक ओर उन्हें विरोधियों के तीर तो सहने ही पड़ेंगे, वहीं नाराज हजकाई भी उनकी राह में बाधा पैदा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।ऐसे में निश्चत तौर पर दोनों दलों के तालमेल पर असर पड़ेगा। वहीं बवानीखेड़ा में स्थिति इसके विपरीत है। सीट हजकां के खाते में हैं लेकिन बसपा का बेस कैडर वहां उपेक्षित महसूस कर रहा है। ऐसे में बसपा का वोट बैंक उन्हें मिलने से रहा। स्थिति उस समय गंभीर हो जाएगी यदि हजकां ऐसे प्रत्याशी को मैदान में उतार देती है जो कभी इस क्षेत्र में सक्रिय ही नहीं रहा और लोकसभा चुनाव में मैदान में तो जरुर आए लेकिन जमानत तक भी नहीं बचा पाए।वहीं बागियों का विरोध सो अलग। इसलिए सबसे पहले जरुरी था कि दोनों दल दिलों की गांठ खोलने का प्रयास करते और उसके बाद ही सीटों का बंटवारा किया जाता। लेकिन गठबंधन की घोषणा के महीनों बाद तो दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं ने कोई संयुक्त जनसभा की और ही संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन। कार्यकर्ता आखिर तक गठबंधन टूटने की आशंका को पाले रहे। ऐसे में एकजुट होकर चुनाव लडऩे की उम्मीद करना ही बेमानी दिखता है।







Monday, August 24, 2009

अक्टूबर में महाभारत

लोक सभा चुनाव की हवा भुनाना चाहती है कांग्रेस
विधानसभा भंग, विपक्ष अपनी लडाई में जुटा
लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित हुड्डा सरकार ने विधानसभा भंग करने का फैसला किया है। कैबिनेट की सिफारिश को राज्यपाल जगन्नाथ पहाडि़या ने मंजूर कर लिया और विधानसभा को भंग कर दिया। अब राज्यपाल इसकी सूचना चुनाव आयोग को भेजेंगे। हरियाणा विधानसभा का अभी छह महीने का कार्यकाल बचा हुआ था। विपक्षी दलों इनेलो, हजकां, भाजपा और बसपा ने शीघ्र चुनाव कराने का स्वागत किया है। अब चुनाव आयोग के पाले मे गेंद है कि वह हरियाणा विधानसभा के चुनाव कब कराए। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग शीघ्र ही महाराष्ट्र व दूसरे राज्यों में होने वाले चुनाव के साथ ही हरियाणा विधानसभा के चुनाव कराने की घोषणा कर देगा। अनुमान है किaa दशहरे व दीपावली के बीच 12 या 14 अक्टूबर को मतदान होगा।

वहीं विपक्ष लोकसभा चुनाव से हार से सबक लेने की बजाय अभी भी बिल्लियों की लडाई में जुटा है। हालत यह है कि अब भाजपा ने इनेलो से अलग रह पर चलने का एलान कर दिया है। वहीं हजकां और बसपा में भी सिर फुटटोवल जारी है।

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही चर्चाएं शुरू हो गई थी कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव भी शीघ्र कराएगी, क्योंकि उसे हरियाणा में 10 में से नौ सीटों पर जीत मिली थी। इसके बाद लगातार शीघ्र चुनाव की चर्चा रही पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने इस मुद्दे पर अपना मुंह नहीं खोला। 18 अगस्त को चंडीगढ़ में पार्टी की बैठक भी हुई, जिसमें हुड्डा व दूसरे नेताओं ने पार्टीजनों को चुनाव के लिए तैयार रहने का आहवान किया था। मुख्यमंत्री के संकेत के कारण नौकरशाही भी काम निपटाने में लगी थी ताकि आचार संहिता लगने से कोई काम बीच में न रह जाए। इस बीच 22August को कैबिनेट ने बैठक में प्रस्ताव पास कर विधानसभा भंग करने का एलान कर दिया। साथ ही Governor ने भी प्रस्ताव मंजूर कर लिया ।
चुनाव की घोषणा के बाद सरगर्मी तेज़ करने की बजाए भाजपा ने इनेलो से अलग रह पर चलने का एलान कर दिया है। इनेलो नेता ओमप्रकाश चौटाला और भाजपा नेता सुषमा स्वराज की दिल्ली में रविवार को विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर हुई बैठक में सहमति नहीं बन पाई. लोकसभा चुनाव में भी सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों में खींचतान हो गई थी। भाजपा अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, सोनीपत, फरीदाबाद, गुड़गांव व रोहतक सीटों पर दावा कर रही थी, पर इनेलो इसके लिए राजी नहीं था। भाजपा ने अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, फरीदाबाद व गुड़गांव सीटों के लिए एकतरफा अपने प्रत्याशियों के नामों का एलान कर दिया था। इसका इनेलो ने काफी विरोध किया था। बाद में सोनीपत और रोहतक सीट पर काफी खींचतान हुई। आखिरकार सोनीपत सीट भाजपा और रोहतक सीट इनेलो को मिली। चुनाव के दौरान दोनों दलों के बीच कोई खास अच्छा तालमेल नहीं रहा। इसका ही परिणाम था कि गठबंधन एक भी सीट नहीं जीत सका ।

अब हजकां और बसपा की खींचतान क्या रंग लेगी कहा नहीं जा सकता लेकिन ऐसा जरूर है की डोमों दलों के कार्यकर्त्ता अभी भी एक-दूसरे से नहीं मिल पाये हैं। बवानी खेडा और बरवाला पर टकराव बढ़ चुका है।