Wednesday, November 23, 2011

सरकार की शिक्षा को उच्च प्राथमिकता : भुक्कल

गुड़गांव : हरियाणा की शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने बुधवार को सेक्टर-44 स्थित एपी सेंटर में स्कूल शिक्षा बोर्ड परिषद (कोबसे) के 40वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि शिक्षा में सतत और समग्र मूल्याकन पद्धति लागू करने का उद्देश्य बच्चों के व्यक्तित्व का सर्वागीण विकास करके उन्हे अच्छे इसान और अच्छे नागरिक बनाना है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार शिक्षा के क्षेत्र को उच्च प्राथमिकता देती है और इसमें खर्च होने वाली राशि को खर्च न मान कर निवेश मानती है।

सम्मेलन का आयोजन स्कूल शिक्षा बोर्ड परिषद और हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड ने संयुक्त रूप से किया है। तीन दिन के इस सम्मेलन में सतत और समग्र मूल्याकन पद्धति के व्यवहारिक पहलुओं पर विचार-विमर्श होगा।
सम्मेलन में जाने माने शिक्षाविद्, विभिन्न राज्यों के शिक्षा बोर्डो के अधिकारी और ब्रिटेन, पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, सिंगापुर और मारीशस जैसे देशों के शिक्षा बोर्डो के 68 प्रतिनिधि भाग ले रहे है। भुक्कल ने कहा कि सम्मेलन में मुख्यमंत्री अन्य अनिवार्य व्यस्तताओं के कारण स्वयं नहीं आ सके है, लेकिन उन्होंने सम्मेलन में भाग लेने वाले सभी प्रतिनिधियों के लिए शुभकामनाएं भेजी है और सम्मेलन की सफलता की कामना की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के मामले में क्षेत्रीय असंतुलनों को दूर करने, लड़कों की तरह लड़कियों को बराबर की शिक्षा देने और शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने की पूरी कोशिश कर रही है। भिवानी में लेबोरेटरी स्कूल खोला गया है, जिसके पीछे यह धारणा है कि बच्चे वास्तविक जीवन जैसी परिस्थितियों में अच्छी तरह सीख सकते है। लिहाजा इस स्कूल में ऐसी शिक्षा परियोजनाएं शुरू की गई है, जिनमें बच्चे मिल कर सीखते है और सामाजिक जिम्मेदारी को महसूस करते हुए फैसले लेते है। उनकी शिक्षा का मूल्याकन परियोजनाओं में उनकी भागीदारी, समझ और दूसरों के प्रति व्यवहार के आधार पर किया जाता है।
सम्मेलन में हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की अध्यक्ष तथा विद्यालय शिक्षा विभाग की वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव सुरीना राजन भी वहां मौजूद रहीं।

Monday, December 7, 2009

सरकार की जेब खाली?

अफसर बिजनेस क्लास में नहीं कर सकेंगे हवाई सफर
नए फर्नीचर की खरीद पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई
प्रदेश सरकार की लोक लुभावनी घोषणाओं का असर अब सरकार की जेब पर भारी पडऩे लगा है और इसका ही नतीजा है कि सरकार तंगहाली में दिखाई दे रही है। इसी तंगहाली के चलते सरकार को अब खर्चों में कटौती की याद आ रही है।अभी तक मजबूत आर्थिक स्थिति का दावा करने वाली सरकार ने सभी विभागों को खर्चों में कटौती के निर्देश दिए हैं।
हरियाणा में सरकारी अफसर अब बिजनेस क्लास में हवाई सफर नहीं कर पाएंगे। उन्हें साधारण श्रेणी में ही सफर करना होगा। तंगहाल सरकार की ओर से सरकारी खर्चों मे कटौती का फरमान जारी हो गया है। सोमवार को प्रदेश के वित्त विभाग के वित्तायुक्त व प्रधान सचिव ने सरकारी खर्चों में कटौती का परिपत्र (सरकूलर) जारी किया है।
सभी विभागाध्यक्षों, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार, सभी मंडल आयुक्तों व आयुक्तों, निगमों व बोर्डों और विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों को यह परिपत्र भेजा गया है। परिपत्र के निर्देश के मुताबिक वर्ष 2009 व 10 में हर विभाग को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय सफर के खर्च में, प्रकाशन में, पेशेवर सेवाओं में, विज्ञापन व प्रचार में, दफ्तर के खर्च में और अन्य प्रशासनिक खर्चों में पांच फीसदी की कटौती करने को कहा गया है, लेकिन यह शर्तें सुरक्षा मामलों में लागू नहीं होगी। इसी प्रकार वर्ष 2010-11 में इन्हीं मदों में पांच प्रतिशत की और कटौती करनी होगी। यानी यह कटौती बढ़कर 10 फीसदी हो जाएगी।
परिपत्र के निर्देश के मुताबिक दफ्तर के नए फर्नीचर की खरीद पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। पुरानी कंडम कार को बदले जाने की स्थिति के अलावा नई कार नहीं खरीदे जाने के निर्देश दिए गए हैं। नए पदों के अपग्रेडेशन पर पूरी तरह से पाबंदी होगी। नए पद केवल वित विभाग की मंजूरी से अपवाद के रूप में ही सृजित किए जाएंगे। कोई भी सरकारी अफसर बिजनेस क्लास में हवाई सफर नहीं कर पाएगा। परिपत्र के अनुसार दो साल से रिक्त पद केवल वित्त विभाग की मंजूरी से ही भरे जाएंगे।

राजस्व में कमी के संकेत
हरियाणा सरकार को तीन प्रमुख विभागों से राजस्व प्राप्त होता है। पहला टाउन एवं कंट्री प्लानिंग से भूमि उपयोग परिवर्तन का शुल्क, दूसरा राजस्व विभाग से स्टांप ड्यूटी और तीसरा आबकारी व कराधान विभाग से वैट, सीएसटी और शराब की बिक्री से प्राप्त राजस्व होता है।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को अक्टूबर 2008 में 943 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ जबकि उसका लक्ष्य 2900 करोड़ रुपये का था। इसके इलावा इस विभाग को 350 करोड़ रुपये का रिफंड भी देना पड़ा था।
राजस्व विभाग को 2100 रुपये करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले में 1040 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए।
आबकारी व कराधान विभाग को वैट व सीएसटी को लक्ष्य के 400 करोड़ रुपये कम प्राप्त हुए।
दूसरी तरफ, साल 2009-10 के हरियाणा सरकार के बजट में 3484 करोड़ का घाटा था, जबकि साल 2008-09 में 1414 करोड़ सरपल्स का बजट था।

Saturday, December 5, 2009

Wednesday, December 2, 2009

Supreme Court ने आरक्षण पर शुरू की नई बहस

आरक्षण राज्यों का विवेकाधिकार : सुप्रीम कोर्ट
एमडी-एमएस प्रवेश में आरक्षण मामले में हरियाणा सरकार को राहत
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अपने एक अहम फैसले में कहा है कि शैक्षणिक संस्थाओं में मेडिकल के पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) या पिछड़े वर्ग को आरक्षण देना राज्य सरकारों का विवेकाधिकार है। कोर्ट आरक्षण देने के लिए कोई रिट आदेश जारी नहीं कर सकता। इसके साथ ही आरक्षण के मसले पर नई बहस शुरू हो गई है।मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन, न्यायमूर्ति पी. सत्शिवम व न्यायमूर्ति जे.एम. पांचाल की पीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला हरियाणा के सरकारी मेडिकल कालेजों में पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश में एससी-एसटी छात्रों को आरक्षण दिए जाने की मांग खारिज करते हुए सुनाया है। पीठ ने राज्य सरकार को आरक्षण देने के आदेश जारी करने की मांग ठुकराते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 15 (4) में राज्य सरकारों को मेडिकल के पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में आरक्षण लागू करने का अधिकार दिया गया है। पर यह राज्यों पर निर्भर करेगा कि वे इस संबंध में कोई कानून बनाते हैं या कोई कार्यकारी आदेश पारित करते हैं अथवा नहीं।कोर्ट ने कहा है कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश में एसएसी, एसटी या पिछड़े वर्ग को आरक्षण दिए जाने के बारे मे राज्य सरकारें ही सबसे अच्छी निर्णायक (बेस्ट जज) हो सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल पाठ्यक्रम प्रवेश में आरक्षण न देने के हरियाणा सरकार के फैसले में कोई खामी नहीं है। प्रत्येक राज्य अपने यहां की स्थिति के मद्देनजर आरक्षण देने या नहीं देने का फैसला खुद ले सकता है। कोर्ट ने कहा है कि अगर हरियाणा सरकार ने स्नातक स्तर के मेडिकल पाठ्यक्रम एमबीबीएस व अंडर ग्रेजुएट पाठ्यक्रम प्रवेश में एससी, एसटी व पिछड़े वर्ग को आरक्षण दे रखा है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर भी आरक्षण देने को बाध्य है। राज्य सरकार कई बार कह चुकी है कि वह पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर आरक्षण देने के हक में नहीं है तो ऐसी परिस्थितियों में कोर्ट उसके फैसले के खिलाफ आदेश नहीं जारी कर सकता। पीठ ने कहा कि आरक्षण नहीं देने वाले विश्वविद्यालय के प्रवेश प्रास्पेक्टस को गलत नहीं कहा जा सकता। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार चाहे तो भविष्य में अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर सकती है। एम्स द्वारा अखिल भारतीय स्तर कर कराई जाने वाली पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रम प्रवेश परीक्षा में आरक्षण लागू होने की दलील पर कोर्ट ने कहा कि वह केन्द्र सरकार का फैसला है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसे देखते हुए राज्य सरकारें भी उसे लागू करने के लिए बाध्य हैं। जहां पर राज्य सरकार को प्रवेश परीक्षा में नियमन व नियंत्रण का अधिकार है वह आरक्षण लागू करने के बारे में स्वयं निर्णय ले सकती है।

विकलांगों को तोहफा

विश्व विकलांग दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 'जवाहर सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन' योजना शुरू करने की घोषणा की। इस योजना के तहत विकलांगों, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के विकास एवं उत्थान पर विशेष बल दिया जाएगा। जिलास्तर पर विशेष स्कूल या संस्थान खोले जाएंगे। इसके लिए 150 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।विश्व विकलांग दिवस पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी तरह की इस पहली योजना के तहत नेत्रहीनों, मूक एवं बधिरों, शारीरिक रूप से विकलांग लोगों, मानसिक विक्षिप्तों, वरिष्ठ नागरिकों तथा बच्चों के लिए जिला स्तर पर विशेष स्कूल या संस्थान स्थापित किए जाएंगे। योजना के तहत नेत्रहीनों के लिए 10 विद्यालय, मूक एवं बधिरों के लिए आठ विद्यालय, मानसिक विक्षिप्तों के लिए छह विद्यालय, तीन राज्यस्तरीय संस्थान, मानसिक विक्षिप्तों के लिए दो गृह, वरिष्ठ नागरिकों के लिए चार गृह, छह बाल गृह तथा 21 व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तथा प्रस्तावित भवनों के नक्शे पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसिक विक्षिप्तों के लाभार्थ 'घरौंदा' नामक अन्य योजना लागू की गई है, ताकि उन्हें आश्रय उपलब्ध कराया जा सके। यह योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे मानसिक विक्षिप्तों के लिए राष्ट्रीय न्यास तथा राज्य सरकार द्वारा बराबर हिस्सेदारी के आधार पर चलाई जा रही है। गरीबी रेखा से ऊपर वाले मानसिक विक्षिप्त आठ लाख रुपये की राशि अदा करके इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश सरकार ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए एक करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।

कुम्हारिया में 2012 में शुरू होगा उत्पादन

न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन आफ इंडिया का विशेष दल हरियाणा पहुंचा
700-700 मेगावाट की चार इकाइयां स्थापित होंगी
Nuclear Power Corporation of India (NPCIL) ने फतेहाबाद के कुम्हारिया में न्यूक्लियर पावर परियोजना स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और 2012 में इसकी प्रथम व द्वितीय इकाइयां काम करना शुरू कर देंगी। इस संबंध में न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक डा. एसके जैन के नेतृत्व में निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का दल हरियाणा पहुंच चुका है। दल ने बुधवार को चंडीगढ़ में हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली बैठक की। यह दल नई दिल्ली में शुक्रवार को मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा से भी भेंट करेंगे। इससे पूर्व वह कुम्हारिया का दौरा करेंगे। बैठक की अध्यक्षता वित्त विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव अजीत एम शरण ने की। इस परमाणु ऊर्जा केंद्र में 700-700 मेगावाट की चार इकाइयां स्थापित की जाएंगी और केंद्र की कुल क्षमता 2800 मेगावाट होगी। न्यक्लियर पावर कारपोरेशन की टीम बृहस्पतिवार को क्षेत्र का दौरा करेगी और उसके बाद हरियाणा सरकार जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई को आगे बढ़ा पाएगी।सूत्रों के अनुसार हरियाणा सरकार इस प्लांट के लिए जमीन का दायरा कम करने की तैयारी कर रही है। इससे पूर्व 2471 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की बात की जा रही थी, लेकिन अब मात्र 1100 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने पर विचार चल रहा है। प्रदेश सरकार का मानना है कि इससे प्लांट का विरोध कम होगा और अधिग्रहण की कार्रवाई को जल्द सिरे चढ़ाया जा सकेगा।एनपीसीआईएल के एमडी जैन ने दावा किया है कि कुम्हारिया में प्रदूषण रहित एक ग्रीन प्रोजेक्ट होगा और जिसके रेडिएशन से भी स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।डा. एस के जैन ने कहा कि यह परियोजना भारी पानी के दवाब की स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगी। एनपीसीआईएल ने 17 न्यूक्लियर पावर परियोजनाएं स्थापित की हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010-11 तक या 2012 से पूर्व इस पूर्व-परियोजना का कार्य पूरा हो जाएगा। प्रथम और द्वितीय इकाई का निर्माण मार्च 2012 तक आरंभ हो जाएगा। तीसरी और चौथी इकाई का कार्य लगभग तीन या चार वर्षों उपरांत शुरू होगा। प्रोजेक्ट से उत्पादित बिजली का शुल्क लगभग 2.7 रुपये प्रति यूनिट होगा, जो देश में कोयला आधारित संयत्रों से उत्पादित बिजली की वर्तमान दर से बहुत सस्ती होगी। डा. जैन ने बताया कि निगम द्वारा चिकित्सा सुविधा और एक टाउनशिप के अतिरिक्त एक सीबीएसई स्कूल की भी स्थापना की जाएगी। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार और गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार में न्यूक्लियर टैक्रोलोजी में परियोजना शुरू करने के लिए एनपीसीआईएल की सहायता की भी उन्होंने पेशकश की है। बैठक में बिजली विभाग के वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव मधुसूदन प्रसाद, बिजली निगमों के प्रबंध निदेशक ले. जनरल (सेवानिवृत) ओ एस लोहचब तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

Saturday, November 28, 2009

हजारों साल पुरानी संस्कृति का साक्षी Banawali

फतेहाबाद-गांव नागपुर संपर्क मार्ग पर बसा गांव बनावली का किला अपने अंदर करीब पांच हजार वर्ष पुरानी हड़प्पा संस्कृति का इतिहास समेटे हुए है। खुदाई के दौरान ऐतिहासिक किले में दबी हड़प्पा संस्कृति (2600-2400 ईपू) के तीनों कालों के लोगों के रहन-सहन, खान पान, धार्मिक मान्यताओं व अन्य सभी प्रकार की जानकारियां मिलती हैं। करीब 32 एकड़ क्षेत्र में फैली इस प्राचीन धरोहर की पहचान 1960 के आसपास हुई तथा 1974 से 1988 तक यहां खुदाई का कार्य किया गया। अब इस ऐतिहासिक धरोहर को संजोने के लिए बनावली को विश्व धरोहर में शामिल करने का प्रस्ताव यूनेस्को के पास भेजने का निर्णय किया गया है। अगर यह योजना सिरे चढ़ती है तो निश्चित तौर पर इतिहास की इस महत्वपूर्ण कड़ी को सहेजकर रखा जा सकेगा। खुदाई के दौरान मिली ऐतिहासिक महत्व की वस्तुओं से हड़प्पाकालीन सभ्यता की बहुत महत्वपूर्ण जानकारी मिल पाई।
1988 के बाद यहां अभी तक किसी प्रकार की खुदाई नहीं हुई है। यहां सबसे पहले हरियाणा पुरातत्व विभाग ने 1974 में खुदाई की तथा 1977 तक समय-समय पर यह कार्य किया जाता रहा। इसमें उसे कुछ विशेष हाथ नहीं लगा। इसके बाद भारतीय पुरातत्व विभाग ने 1977 में इसकी खुदाई का कार्य अपने हाथों में लिया। इससे इस स्थान के हड़प्पाकालीन सभ्यता से जुड़े होने का निष्कर्ष निकाला गया। भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे 4 सितंबर 1982 को अपने कब्जे में लिया और 1988 तक खुदाई का काम जारी रखा। खुदाई के दौरान मिले शहर के किले का मुख्य गेट पक्की र्इंटों से तथा अन्य पूरा हिस्सा कच्ची ईटों से बना है। करीब 32 एकड़ में फैले इस पुरातत्व महत्व के किले पर फिलहाल करीब 12 एकड़ भूमि पर ही विभाग का कब्जा है। जबकि करीब 24 एकड़ जमीन पर किसानों द्वारा खेती की जा रही है।

इतिहासकार डा. मुनीष नागपाल ने कहा कि यदि इसे विश्व धरोहर का दर्जा मिलता है तो इससे आने वाली पीढि़यों को बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। इसी प्रकार से डॉ. कृष्ण कुमार ने कहा कि यदि ऐसा हो पाया तो इसे संग्रहित करने के लिए पर्याप्त धन की व्यवस्था हो पाएगी। इतिहासकार डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि ऐसा होने से विश्व में बनावाली के साथ-साथ जिला व प्रदेश का नाम भी रोशन होगा। महानगरीय संस्कृति थी बनावली.. वस्तुओं की चूडि़यां भी पहनती थीं। इस क्षेत्र से टेरोकोटा, स्पायरल कापर हेयर-पिन, देवियों की मूर्तियां आदि भी मिले हैं।

कहां-कहां मिले हैं ऐसे स्थान
करीब पांच साल पुरानी इस सभ्यता के इससे मिलते जुलते अवशेष हिसार जिले के गांव राखी, गुजरात के लोथल व राजस्थान के कालीभंगा में भी पाए गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि हड़प्पा संस्कृति उत्तर भारत से होती हुई अफगानिस्तान व पाकिस्तान तक फैली हुई थी। हड़प्पा सभ्यता के लोग नगरों में रहते थे। जिनकी गलियां आर-पार गुजरती थीं। इसी प्रकार इस सभ्यता में बनाए गए मकान भी आरपार होते थे।
क्या-क्या मिला खुदाई में
विभाग को खुदाई के दौरान अंडाकार तथा गोलाकार चूल्हों से लैस सुनियोजित ढंग से बनाए गए मकान, कांच से बने मर्तबान तथा कलश, परात, प्यालियां, कुठार, जार, सोने के मुकने, मूल्यवान पत्थर, मृदभांड, छेलखड़ी, मिट्टी की चूडि़यां, शंख व तांबा सहित अनेक वस्तुएं मिलीं। इसके अलावा जानवरों एवं फूलों के चित्रों बने हुए खाना खाने व पकाने के हांडी बीकर, परात, पानपात्र, एस आकार के जार, ईट, चर्ट ब्लेड, हाथी दांत व हड्डियों के खिलौने, सोने तथा मूल्यवान पत्थरों के मनके, सोने की पत्ती चढे़ तांबे के आभूषण, मिट्टी से बनी जानवरों की आकृतियां, अभिलेख युक्त मुद्रा तथा मुद्रिकाएं आदि के अवशेष मिले। इसके अलावा जौ के जले अवशेष व मनकों की फैक्टरी भी मिली है।