Showing posts with label court. Show all posts
Showing posts with label court. Show all posts

Monday, November 9, 2009

डबवाली अग्निकांड : जख्मों पर मुआवजे का मरहम

45 फीसदी हिस्सा सरकार व 55 फीसदी मैरिज पैलेस व स्कूल प्रबंधन देगा
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट अपने एक ऐतिहासिक फैसले में डबवाली अग्निकांड के पीडि़तों को मुआवजा देने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने सोमवार को डबवाली अग्निकांड के पीडि़तों के लिए अलग-अलग वर्ग के लिए मुआवजा राशि तय कर दी। पीडि़तों को डेढ़ लाख से 33.50 लाख रुपये तक मुआवजा राशि मिलेगी। यह राशि जून 2003 से छह फीसदी ब्याज की दर पर मिलगी। खंडपीठ ने हरियाणा सरकार को मुआवजे का भुगतान चार महीने के भीतर करने का आदेश दिया है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा ओर मुआवजा राशि पर दस फीसदी की दर से ब्याज देना होगा।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली की खंडपीठ ने अपने फैसले मे कहा कि कुल मुआवजा राशि का 45 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा सरकार (इसमें से 15 प्रतिशत नगर रिषद डबवाली, 15 प्रतिशत बिजली बोर्ड व 15 प्रतिशत उस समय के उपायुक्त एमपी बदलान) व 55 प्रतिशत राजीव मैरिज पैलेस व डीएवी ग्रुप अदा करेगा। हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में हरियाणा सरकार को मुआवजे के अतिरिक्त पीडि़तों लोगों को मुकदमा राशि का भुगतान करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि चार माह में भुगतान नहीं होने पर कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी और सरकार सरकार को राशि पर दस प्रतिशत ब्याज देना होगा।हाईकोर्ट ने क्या मुआवजा तय कियाहाईकोर्ट द्वारा नियुक्त आयोग ने हादसे में मारे गए लोगों के लिए आयु व उनकी आय हिसाब से अलग- अलग श्रेणी में मुआवजा तय किया था। इस पर पीडि़तों लोगों ने आपत्ति दर्ज की थी। इस हादसे में कुल 446 लोगों की मौत हुई थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस हादसे में घायल लोगों के लिए भी उनकी आयु व उनके वर्ग के हिसाब से मुआवजा तय किया है। अविवाहित लड़की को उसके घायल की प्रतिशतता के हिसाब से पांच लाख से 33.50 लाख रुपये तक मुआवजा तय किया गया है। अविवाहित लड़के को घायल की प्रतिशतता के हिसाब से चार लाख रुपये से 32.50 लाख रुपये तक मुआवजा मिलेगा। विवाहित महिला को 1.50 लाख से 22 लाख व विवाहित पुरुष को चार लाख से 16 लाख के बीच मुआवजा राशि मिलेगी।

आयोग ने मुआवजे में ऐसे तय की थी हिस्सेदारी : हाईकोर्ट के आदेश पर बने जस्टिस टी.पी. गर्ग आयोग ने अपनी रिपोर्ट में मुआवजा की राशि का 80 प्रतिशत हिस्सा डीएवी ग्रुप, दस प्रतिशत डीसी सिरसा, जिसे हरियाणा सरकार देगी व पांच-पांच प्रतिशत एमसी व बिजली बोर्ड से लेने की सिफारिश की थी। आयोग ने इस कांड से प्रभावित लोगों को उनकी उम्र व उनके आय के हिसाब से मुआवजा राशि देने की सिफारिश भी की थी।
पीजीआई और एम्स में होगा मुफ्त इलाज
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सरकार को यह भी आदेश दिया कि इस हादसे में जो लोग पीडि़त हैं, अगर राज्य सरकार के अस्पताल में इनके इलाज की सुविधा नहीं है तो पीजीआई और एम्स में इनका मुफ्त इलाज करवाए।

मुआवजा राशि का विवरण
वर्ग-1 साल से 10 साल तक के बच्चे -- संख्या -172
आयोग ने तय किया दो लाख, हाईकोर्ट ने तय किया 3.50 लाख
-------------------------------------------------------------------
वर्ग- 11 साल से 15 साल तक के बच्चे -- संख्या 38
आयोग ने तय किया 4.10 लाख, हाईकोर्ट ने तय किया 5.25 लाख
-------------------------------------------------------------------
वर्ग- 16 साल से 22 साल तक के बच्चे -- संख्या- 20
आयोग ने तय किया पांच लाख, हाईकोर्ट ने तय किया 6.35 लाख
--------------------------------------------------------------------
इसके अलावा कोर्ट ने 22 साल से ऊपर की उम्र के मृतकों के परिजनों को मृतकों के पेशे व उम्र के हिसाब से मुआवजा तय किया है जो कम से कम 2.50 लाख व अधिकतम 22 लाख रुपये है। हाईकोर्ट ने यह मुआवजा राशि जून 2003 की तारीख से तय की है। जून 2003 के बाद से राशि पर छह प्रतिशत के हिसाब से ब्याज भी देना होगा।
क्या था मामला?
डबवाली के डीएवी पब्लिक स्कूल का वार्षिक समारोह वहां के राजीव मैरिज पैलेस में 23 दिसंबर 1995 को हो रहा था। इसी दौरान भयंकर आग ने सभी को अपनी चपेट में ले लिया था। इससे स्कूली बच्चों, शिक्षकों, अभिभावकों सहित 446 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। हरियाणा सरकार ने उस समय मारे गए लोगों के परिवारों को एक-एक लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल होने वाले लोगों को 50-50 हजार रुपये सहायता राशि के रूप में दिए थे। अदालत के आदेशों पर घायलों के उपचार पर होने वाला खर्च भी सरकार द्वारा उठाया गया था।

Tuesday, April 28, 2009

तीन भाइयों को फांसी, पत्नियों को उम्रकैद

हिसार : एक वर्ष पूर्व बीड़ बबरान गांव में हुए तिहरे हत्याकांड में अदालत ने 23 अप्रैल को तीन भाइयों को फांसी व उनकी पत्नियों और चाचा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में अदालत ने महिला सहित चार आरोपियों को पहले ही बरी कर दिया था। पिछले वर्ष अप्रैल माह में बीड़ बबरान गांव में जमीनी विवाद में राजबीर, उसके भाई रमेश कुमार और भाभी शकुंतला की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बिमलेश तंवर की अदालत ने तीन भाइयों आजाद सिंह उर्फ यादवेंद्र, हरजिंद्र सिंह उर्फ राजेंद्र, भूपेंद्र सिंह उर्फ भुंडा को फांसी व चार-चार हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है जबकि राजेंद्र की पत्नी बलविंदर कौर, भूपेंद्र की पत्नी राजविंदर कौर, यादविंदर उर्फ आजाद की पत्नी सुखविंदर कौर व इनके चाचा जगपाल को आजीवन कारावास व पांच-पांच हजार रुपये की सजा सुनाई है। इस मामले में अदालत ने जागीर कौर, सुखदेव, रणजीत उर्फ जीता तथा अवतार उर्फ तारी को बरी कर दिया था। बीड़ बबरान निवासी कर्मबीर सिंह ने पुलिस को बताया था कि घटना की रात वह अपने भाई राजबीर, रमेश, पत्नी शकुंतला और राजबीर की पुत्री रेणु के साथ खेत में गेहूं काट रहा था। उनके खेत के दो तरफ आजाद सिंह की जमीन लगती है तथा आजाद सिंह, भूपेंद्र व राजेंद्र के साथ उनका पुराना जमीनी विवाद चल रहा है। घटना वाले दिन उक्त तीनों अपने परिजनों जगपाल, सुखविंदर कौर, भूपेंद्र, राजेंद्र तथा तीन अन्य के साथ खेतों में आए। राजेंद्र व भूपेंद्र ने पिस्तौल से जबकि जगपाल ने बंदूक से फायरिंग की। इस पर वह जान बचाकर फरार हो गया और उक्त लोगों ने राजबीर, रमेश और शकुंतला की हत्या कर दी जबकि रेणु गंभीर रूप से घायल हो गई थी। सदर थाना पुलिस ने इस संबंध में आजाद सिंह, भूपेंद्र व राजिंद्र सिंह, तीनों की पत्नियों, चाचा जगपाल सिंह और अन्य के खिलाफ हत्या, हत्या प्रयास, तोड़-फोड़ और शस्त्र अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। क्या थी मामले की जड़ : मामले के अनुसार कर्मबीर के परिवार वालों ने भूपेंद्र सिंह के परिवार वालों से जमीन खरीद थी। इसके लिए भूपेंद्र सिंह परिवार को रुपये भी दे दिए लेकिन इन्होंने जमीन नाम नहीं करवाई। इस पर उन्होंने अदालत का सहारा लिया और अदालत ने भूपेंद्र सिंह के परिवार को आदेश दिया कि वह कर्मबीर के परिवार के नाम जमीन करवाए। इस आदेश के बाद इनका विवाद बढ़ गया और घटना को अंजाम दे दिया। हिसार जेल में दो भाई झूल चुके हैं फांसी : जिला अदालत के तीन दशक के फैसलों को देखा जाए तो दो भाई पहले भी केंद्रीय कारागार में फांसी पर झूल चुके हैं। वर्ष 1978 में जाखल के शक्करपुर गांव में हुई दो हत्याओं के मामले में जिला अदालत से वर्ष 1988 को दो भाइयों शक्करपुरा गांव निवासी अमरीक व जीत सिंह को फांसी की सजा हुई थी। यहां केंद्रीय कारागार में दोनों को फांसी पर लटकाया भी गया। दोनों ने जमीनी विवाद में अपने भाई व बहनोई का कत्ल कर दिया था जिसमें इनके माता-पिता सहित तीन घायल हो गए थे। इस मामले में मां-बाप ने चश्मदीद गवाह के रूप में अपने पुत्रों के खिलाफ गवाही दी और जब सुप्रीम कोर्ट से मामला निकल गया तो दोनों ने शपथ-पत्र देकर अपने बयानों को झूठा भी बताया लेकिन कोई रहम नहीं मिला।

Saturday, February 21, 2009

Govt to set up 4,000 village courts

bill will be introduced in Parliament and necessary legislation will be in place in a year or two for setting up these courts, says Balakrishnan
Nearly 4,000 village courts are to be set up in India to help tackle the growing number of pending cases in courts, Supreme Court Chief Justice KG Balakrishnan said on Sunday."Nearly 4,000 gram nayalayas would be soon set up across the country. A bill will be introduced in Parliament and necessary legislation will be in place in a year or two," he said at a function here. Justice Balakrishnan stressed the need for increasing the number of courts in the country, reports IANS. "There is a need for increasing the number by 10 to 15 per cent to dispose off a huge number of accumulated cases," he said. "In some states, the backlog is as high as seven to eight lakh cases. A large number of vacancies of judicial officials are also adding to the problem," he said. For cutting down the backlog and reducing the load on the judiciary, he asked the Bar to come forward and called for a change in the style of the judiciary's functioning. On the setting up of evening courts in some places, Balakrishnan said that the apex court's initiative of starting such courts in New Delhi, Hyderabad and Ahmedabad was quite successful. "We now are planning to start such courts in other states too," he said. He expressed concern over the failure of some states to implement the recommendations of the First National Judicial Pay Commission. The Supreme Court had asked the states and union territories to implement this with effect from April 1, 2003. Justice Jagdish Bhalla, chief justice of the Himachal Pradesh high court, said that the government had agreed to open a Law University in the hill state."The decision would contribute towards providing quality law education in the state," he said.

Tuesday, February 10, 2009

बहादुर बच्चे के अपहर्ता को उम्रकैद

अपहरण व हत्या के प्रयास के मामले में अतिरिक्त फरीदाबाद की जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने एक अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दूसरे पर बाल अदालत में मामला चल रहा है। इस घटना में अदम्य साहस दिखाने वाले अपहृत मास्टर अंकित राय को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।
संजय कालोनी सेक्टर-23 निवासी लल्लन राय ने मामला दर्ज करवाया था कि उसका छह साल का बेटा अंकित राय छह अप्रैल 07 को घर के पास पार्क में खेलते हुए गायब हो गयहै। वह उसकी तलाश कर रहे थे तभी उनके पड़ोस में स्थित पीसीओ पर अपहर्ताओं का फोन आया। उन्होंने उसे छोड़ने के लिए सात लाख रुपये मांगे। यह सुनकर उसके होश उड़ गए और उसने थाने में अंकित के अपहरण का मामला दर्ज करवाया।
पुलिस को अंकित राय के घर में किराये पर रहने वाले पंकज उर्फ लल्लन पर शक हुआ। पंकज अपने एक साथी दिल्ली निवासी जैकी के साथ अंकित को मुजेसर फाटक के पास लेकर आया। यहां उसने उसका गला दबा दिया, जिससे अंकित बेहोश हो गया। उसे मरा समझकर उन्होंने उसे रेलवे ट्रैक पर बांध दिया, जिससे उसकी हत्या, दुर्घटना लगे।
थोड़ी देर बाद अंकित को होश आ गया। तभी ट्रैक पर ट्रेन आने लगी। अंकित का एक हाथ रेलवे लाइन से बंधा हुआ था। ऐसे में वह रेलवे पटरी से पलटी खा गया। ट्रेन की चपेट में आने से उसका वह हाथ कट गया था। हाथ कटने के बाद भी अंकित ने जोश दिखाया और कटे हुए हाथ को लेकर रेलवे लाइन के साथ बसी बस्ती में पहुंच गया। वहां लोगों ने उसे इस हालत में देखा तो उसे थाने ले गए, जहां से उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। इस मामले में शनिवार को अदालत ने अभियुक्त पंकज को दोषी करार दिया था। मंगलवार को अदालत ने पंकज को उम्रकैद व 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर उसे दो साल अतिरिक्त कैद काटनी पड़ेगी। पंकज के साथी जैकी पर बाल अदालत में मामला चल रहा है।

Saturday, February 7, 2009

Court में आत्मदाह

Sonipat के गनौर में सब डिविजनल ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट (एसडीजेएम) की अदालत में शुक्रवार सुबह वहां कार्यरत एक प्यादे ने आत्मदाह कर लिया। इससे पूर्व उसने कोर्ट रूम की दीवार पर लिखकर एसडीजेएम आरके जैन को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उसने तीन पृष्ठ का एक सुसाइड नोट भी लिखा है, जिसमें एसडीजेएम पर नाजायज ढंग से तंग करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने इस संबंध में एसडीजेएम के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भिजवा दिया गया है। प्यादा वेदप्रकाश करनाल के मतारानी कालोनी, चार चमन का रहने वाला था और इस अदालत में कार्यरत था।
एसडीजेएम के रीडर ओमप्रकाश रंगा ने बताया कि शुक्रवार सुबह जब वह अपनी ड्यूटी पर आए तो उन्हें कोर्ट रूम से धुआं निकलता दिखाई दिया। रंगा ने इसकी सूचना तत्काल अन्य लोगों को दी और कोर्ट रूम का दरवाजा खोलने का प्रयास किया, लेकिन वह अंदर से बंद था। जब लोगों ने एसडीजेएम आरके जैन के कमरे की ओर से जाकर कोर्ट रूम का दरवाजा खोला तो सभी दंग रह गए। कोर्ट रूम में जज की कुर्सी के सामने फर्श पर अदालत का प्यादा वेद प्रकाश बुरी तरह झुलसी हालत में पड़ा था और उसकी मौत हो चुकी थी। आग लगने के कारण कोर्ट रूम की कुर्सियां, कंप्यूटर, मेज आदि भी जल गए थे। अदालत कर्मियों ने तत्काल इसकी सूचना गन्नौर पुलिस व एसडीजेएम को दी। सूचना मिलते जज आरके जैन के अलावा गन्नौर डीएसपी बनवारी लाल, थाना प्रभारी सुल्तान सिंह पहुंच गए। पुलिस ने मौके से वेद प्रकाश के हाथों हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम लिखा तीन पेज का पत्र भी बरामद कर लिया। इस पत्र में एसडीजेएम पर नाजायज परेशान करने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच हाईकोर्ट के किसी जस्टिस कराने की गुहार लगाई है। कोर्ट रूम में आत्मदाह की सूचना मिलते ही सेशन जज वीरेंद्र सिंह, एसएसपी नवदीप सिंह विर्क भी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने वेद प्रकाश की पत्नी नीलम की शिकायत पर एसडीजेएम आरके जैन के खिलाफ मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। मौके पर एफएसएल की टीम ने भी जांच-पड़ताल की और शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भिजवा दिया गया।
पुत्र को मिलेगी नौकरी : जिला सेशन जज वीरेंद्र सिंह ने कहा कि वेद प्रकाश के पुत्र तरुण को कोर्ट में नौकरी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि तरुण चाहे तो कल से ही नौकरी पर आ सकता है, उसे सरकार की ओर से नौकरी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि वह बीए पास है तो उसे क्लर्क लगाया जाएगा और यदि वह कम पढ़ा-लिखा है प्यादा के पद पर ही तैनाती होगी। इसके अलावा सरकार की ओर उसके परिवार को हरसंभव सहायता भी प्रदान की जाएगी। चार-पांच महीने पहले ही हुआ था तबादला : पुलिस को दी शिकायत में वेदप्रकाश की पत्नी नीलम ने बताया कि चार-पांच महीने पहले ही वेदप्रकाश का तबादला गन्नौर एसडीजेएम की कोर्ट में हुआ था। इससे पहले वह 25 साल से सोनीपत में तैनात था। शिकायत में उसने कहा है कि वेदप्रकाश से एसडीजेएम चौकीदारी के अलावा घर का काम भी कराते थे और कभी-कभी तो उसके साथ मारपीट भी की जाती थी। नीलम के अनुसार इससे वह काफी परेशान चल रहा था और चार-पांच दिन पहले ही उसने आत्महत्या की भी बात कही थी। यही नहीं एक दिन वह बीमार थी और वेद प्रकाश ने छुट्टी की दरखास्त दी थी, लेकिन जज साहब ने छुट्टी नहीं दी थी। इन सारी बातों के कारण वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गया था।