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Sunday, January 4, 2009

कर्मचारियों को रेवडियाँ

प्रदेश सरकार ने चुनावी तैयारियों को तेज़ करते हुए रेवडियाँ बांटने का सिलसिला और तेज़ कर दिया है। कर्मचारियों के लिए छठा वेतन आयोग लागू करने की घोषणा को जुम्मा-जुम्मा चार दिन ही नहीं हुए थे और अब फ़िर आम आदमी के कर की कमाई का 515 करोड़ अपने कर्मचारियों पर लुटाने का एलान कर दिया।
अब सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने घोषणा की कि प्रदेश के कर्मचारियों को मकान किराया भत्ता केंद्र की तर्ज पर दिया जाएगा। पहली बार कर्मचारियों को शिक्षा भत्ता भी दिया जाएगा, जो 500 रुपये प्रति बच्चा प्रति माह होगा। कर्मचारियों को अच्छा वेतन देने पर किसी को परहेज नहीं है लेकिन बेहतर होता सीएम इसे उनके काम और बेहतर परिणाम से जोड़कर देते।
मुख्यमंत्री शनिवार शाम चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा भत्ता 12वीं कक्षा तक दो बच्चों के लिए होगा और इसकी प्रतिपूर्ति की जाएगी। हुड्डा ने कहा कि इन दोनों प्रोत्साहनों से कर्मचारियों को करीब 515 करोड़ का लाभ पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने तीन सदस्यीय विसंगति समिति के गठन की भी घोषणा की जो मुख्य सचिव की अध्यक्षता में रहेगी और वित्तायुक्त एवं प्रधान सचिव, वित्त एवं विधि परामर्शी इसके सदस्य होंगे। उन्होंने कहा कि कर्मचारी इस समिति को अपने प्रतिवेदन 15 फरवरी 2009 तक दें सकेंगे और इनका निर्णय 15 मार्च 2009 तक कर दिया जाएगा।

Friday, January 2, 2009

डॉक्टर चार को देंगे इस्तीफे !

पंजाब के बराबर वेतनमान नहीं मिलने से खफा सरकारी चिकित्सक अब इस्तीफे की धमकी दे रहे हैं। प्रदेश के चिकित्सकों ने सरकार के खिलाफ आर या पार की लड़ाई का एलान किया है। इसके लिए बाकायदा एचसीएमएस एसोसिएशन ने डॉक्टरों से इस्तीफे लिखवाने भी शुरू कर दिए हैं। ताकि चार जनवरी को रोहतक की बैठक से पहले सरकार पर दबाव बन सके। हालाँकि इस्तीफे की धमकी को अल अधिकारी केवल गीदड़ भभकी मान रहे हैं। एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि रोहतक में डॉक्टर अधिक से अधिक हड़ताल कि घोषणा कर सकते हैं।
क्या है मांग
चिकित्सकों का कहना है कि मार्च 2008 में विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने पंजाब से बेहतर वेतनमान का वादा किया था।इसके बाद मुख्य सचिव ने भी छठे वेतन आयोग के साथ-साथ 25 प्रतिशत एनपीए तथा स्पेशलिस्ट चिकित्सकों को 6 स्पेशल वेतनवृद्धि देना अनुशंसित किया था। इसके बाद वित्त विभाग ने इस फाइल को अनुशंसित कर वेतन आयोग कमेटी के पास भेज दिया था। लेकिन प्रदेश में छठे वेतन आयोग कि रिपोर्ट तो लागू कर दी गई लेकिन डॉक्टरों को किया वादा सरकार भूल गई।