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Wednesday, December 2, 2009
विकलांगों को तोहफा
विश्व विकलांग दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 'जवाहर सोशल इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन' योजना शुरू करने की घोषणा की। इस योजना के तहत विकलांगों, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के विकास एवं उत्थान पर विशेष बल दिया जाएगा। जिलास्तर पर विशेष स्कूल या संस्थान खोले जाएंगे। इसके लिए 150 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है।विश्व विकलांग दिवस पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी तरह की इस पहली योजना के तहत नेत्रहीनों, मूक एवं बधिरों, शारीरिक रूप से विकलांग लोगों, मानसिक विक्षिप्तों, वरिष्ठ नागरिकों तथा बच्चों के लिए जिला स्तर पर विशेष स्कूल या संस्थान स्थापित किए जाएंगे। योजना के तहत नेत्रहीनों के लिए 10 विद्यालय, मूक एवं बधिरों के लिए आठ विद्यालय, मानसिक विक्षिप्तों के लिए छह विद्यालय, तीन राज्यस्तरीय संस्थान, मानसिक विक्षिप्तों के लिए दो गृह, वरिष्ठ नागरिकों के लिए चार गृह, छह बाल गृह तथा 21 व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तथा प्रस्तावित भवनों के नक्शे पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसिक विक्षिप्तों के लाभार्थ 'घरौंदा' नामक अन्य योजना लागू की गई है, ताकि उन्हें आश्रय उपलब्ध कराया जा सके। यह योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे मानसिक विक्षिप्तों के लिए राष्ट्रीय न्यास तथा राज्य सरकार द्वारा बराबर हिस्सेदारी के आधार पर चलाई जा रही है। गरीबी रेखा से ऊपर वाले मानसिक विक्षिप्त आठ लाख रुपये की राशि अदा करके इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। प्रदेश सरकार ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए एक करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।
Monday, November 16, 2009
केबल आपरेटरों के बहाने निजी चैनलों पर शिकंजा?
प्रदेश में केबल आपरेटरों के बहाने निजी चैनलों पर सरकार ने शिकंजा कस लिया है। अब प्रदेश में केबल का व्यवसाय चलाने के लिए आपरेटरों को सरकार से लाइसेंस लेना होगा और एक शहर में मात्र एक ही आपरेटर को लाइसेंस मिलेगा। इसके लिए हालांकि बहाना मोटी लाइसेंस फीस का किया जा रहा है लेकिन इंडस्ट्री से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इससे निजी चैनलों की चाबी सरकार के हाथ आ जाएगी और उन पर इन आपरेटरों के माध्यम से नियंत्रण लग जाएगा।
इसके अलावा केबल आपरेटर इसे अव्यावहारिक भी बता रहे हैं और साथ ही ट्राई के नियमों के उल्लंघन का आरोप भी ला रहे हैं। दूरदर्शन व दूरसंचार पर नियंत्रण सिर्फ ट्राई का ही होता है और सभी प्रसारणकर्ताओं को ट्राई की हिदायतों का पालन करना होता है, लेकिन केबल आपरेटर सरकार के इस बिल को ट्राई के अधिकार क्षेत्र में उल्लंघन बता रहे हैं। सरकार ने फैसला लिया है केबल आपरेटर के लिए लाइसेंस खुली बोली से दिए जाएंगे और जो भी ज्यादा बोली देगा वह इसका लाइसेंस हासिल कर पाएगा लेकिन जो ज्यादा बोली देगा, वह अपने लाभ के लिए दरें भी बढ़ाएगा, पर दरें तो TRAI ने पहले ही तय कर रखी हैं और केबल आपरेटर उसी के हिसाब से चैनलों के पैकेज के अनुरूप उपभोक्ता से दाम वसूल सकता है। अगर सरकार उन्हें ज्यादा दाम वसूलने की इजाजत देती है तो इससे ट्राई के नियमों का उल्लंघन होगा।जाहिर तोर प्रदेश सरकार के इस बिल ने केबल संचालकों में बैचेनी पैदा कर दी है। ऐसे में यदि बिना केबल का व्यवसाय किए कोई व्यक्ति बोली में सफल हो जाता है तो न सिर्फ व्यवसाय कर रहे लोगों का धंधा चौपट होने से उन्हें करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी नया नेटवर्क स्थापित होने तक केबल देखने से वंचित होना पड़ेगा। हालांकि इस संबंध में जींद व कुरूक्षेत्र के दो केबल संचालकों ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी गई है और 26 नवम्बर को न्यायालय द्वारा इस संबंध में राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी कर दिया है। अब न सिर्फ शहरों में बल्कि राज्य के लगभग हर गांव यहां तक की ढाणियों में भी केबल पहुंच चुका है और इस व्यवसाय से लगभग 30 हजार लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। किसी भी केबल संचालक को केबल लगाने से पूर्व केन्द्रीय केबल नेटवर्क अधिनियम 1995 के तहत लाइसेंस लेना होता है जो संबंधित क्षेत्र के मुख्य डाकघर से निर्धारित शुल्क देकर ले लिया जाता है। जिसका हर वर्ष नवीनीकरण कराना होता है। हालांकि व्यवसाय को नियंत्रित करने के लिए इसे ट्राई के अधीन किया गया है। केबल व्यवसाय के फैलने व पे-चैनलों के बढ़ते बाजार से ट्राई ने भी समय-समय पर केबल के लिए नियम निर्धारित किए हैं ताकि केबल संचालक उपभोक्ताओं पर मनमर्जी न चला सकें। किसी भी छोटे से शहर में ही केबल का व्यवसाय करने के लिए न सिर्फ लगभग एक करोड़ रुपये की राशि निवेश करनी पड़ती है, बल्कि पूरे शहर में कनेक्शन करने के लिए छह माह का समय भी लगाना पड़ता है। वर्तमान समय में एक ही शहर में एक ही केबल नेटवर्क से अनेक सब-आपरेटर नेटवर्क संचालक को निश्चित कमीशन में लाइन लेकर अलग-अलग हिस्सों में यह व्यवसाय कर रहे हैं। इतना ही नहीं किसी भी शहर में स्थापित केबल नेटवर्क से आसपास के लगभग 40 किलोमीटर दूरी तक के गांवों में तार के जरिये हर गांव के दो-चार बेरोजगार युवक यह व्यवसाय कर रहे हैं।वहीं सभी राजनीतिक दल इस संवेदनशील मुद्दे पर अभी चुप्पी साधे हैं लेकिन उन्हें भी यह आशंका है कि केबल आपरेटरों के जरिए सरकार निजी चैनलों के प्रसारण पर लगाम लगा सकती है और कोई भी सरकार से लाइसेंस प्राप्त आपरेटर सरकार के सामने सिर झुकाते नजर आएंगे। ऐसे में मीडिया पर भी लगाम लग सकती है।
Tuesday, June 2, 2009
पांच साल से पहले नहीं बदले जाएंगे शिक्षक
हरियाणा सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के लिए वर्ष 2009-10 के लिए तबादले संबंधी एक नीति जारी की है। इस नीति के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2009-10 के दौरान अध्यापकों का कोई भी सामान्य तबादला नहीं किया जाएगा। सभी तबादले जारी की गई नीति के दिशानिर्देशों के अनुसार किए जाएंगे। इस नीति की एक-एक प्रति पहले ही प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारी और जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों को भेज दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने जारी बयान में बताया कि कर्मचारी को तबादले के लिए अपने पसंदीदा स्थान के बास्ते संस्थान के मुखिया, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को इस वर्ष 15 जून तक लिखित निवेदन करना होगा जो 30 जून तक निदेशालय को ऐसे निवेदनों की सिफारिशें भेजेंगे और स्थानांतरण प्रक्रिया 30 जुलाई तक पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने बताया कि दिशानिर्देशों के अनुसार किसी भी कर्मचारी का कार्यकाल किसी भी नियुक्ति स्थान पर पांच वर्ष होना चाहिए। जिस भी कर्मचारी के परिणाम पिछले तीन वर्ष से शतप्रतिशत है यदि वह कर्मचारी तबादले का निवेदन नहीं करता है तोउसे पांच वर्ष के बाद भी बदला नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि किसी भी कर्मचारी का स्थानांतरण प्रशासकीय आधार पर प्रदेश सरकार किसी भी समय कर सकती है। प्रवक्ता ने बताया कि निवेदन निर्धारित फार्मेट में तीन विकल्पों सहित करना होगा और पारस्परिक स्थानांतरण के लिए भी निवेदन उसी निर्धारित फोर्मेट में करना होगा और यदि दोनों कर्मचारी 10 कि लोमीटर के दायरे में नियुक्त हैं तो उनके निवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि 50 वर्ष की आयु के महिला और पुरुष अध्यापकों को कन्या विद्यालयों में प्राथमिक तौर पर नियुक्त किया जाएगा। शतप्रतिशत नेत्रहीन और 70 प्रतिशत या उससे अधिक विकलांग अध्यापकों को उनके ब्लॉक या 10 किलोमीटर की परिधि में नियुक्त करने के प्रयास किए जाएंगे।
Saturday, February 21, 2009
Govt to set up 4,000 village courts
bill will be introduced in Parliament and necessary legislation will be in place in a year or two for setting up these courts, says Balakrishnan
Nearly 4,000 village courts are to be set up in India to help tackle the growing number of pending cases in courts, Supreme Court Chief Justice KG Balakrishnan said on Sunday."Nearly 4,000 gram nayalayas would be soon set up across the country. A bill will be introduced in Parliament and necessary legislation will be in place in a year or two," he said at a function here. Justice Balakrishnan stressed the need for increasing the number of courts in the country, reports IANS. "There is a need for increasing the number by 10 to 15 per cent to dispose off a huge number of accumulated cases," he said. "In some states, the backlog is as high as seven to eight lakh cases. A large number of vacancies of judicial officials are also adding to the problem," he said. For cutting down the backlog and reducing the load on the judiciary, he asked the Bar to come forward and called for a change in the style of the judiciary's functioning. On the setting up of evening courts in some places, Balakrishnan said that the apex court's initiative of starting such courts in New Delhi, Hyderabad and Ahmedabad was quite successful. "We now are planning to start such courts in other states too," he said. He expressed concern over the failure of some states to implement the recommendations of the First National Judicial Pay Commission. The Supreme Court had asked the states and union territories to implement this with effect from April 1, 2003. Justice Jagdish Bhalla, chief justice of the Himachal Pradesh high court, said that the government had agreed to open a Law University in the hill state."The decision would contribute towards providing quality law education in the state," he said.
Nearly 4,000 village courts are to be set up in India to help tackle the growing number of pending cases in courts, Supreme Court Chief Justice KG Balakrishnan said on Sunday."Nearly 4,000 gram nayalayas would be soon set up across the country. A bill will be introduced in Parliament and necessary legislation will be in place in a year or two," he said at a function here. Justice Balakrishnan stressed the need for increasing the number of courts in the country, reports IANS. "There is a need for increasing the number by 10 to 15 per cent to dispose off a huge number of accumulated cases," he said. "In some states, the backlog is as high as seven to eight lakh cases. A large number of vacancies of judicial officials are also adding to the problem," he said. For cutting down the backlog and reducing the load on the judiciary, he asked the Bar to come forward and called for a change in the style of the judiciary's functioning. On the setting up of evening courts in some places, Balakrishnan said that the apex court's initiative of starting such courts in New Delhi, Hyderabad and Ahmedabad was quite successful. "We now are planning to start such courts in other states too," he said. He expressed concern over the failure of some states to implement the recommendations of the First National Judicial Pay Commission. The Supreme Court had asked the states and union territories to implement this with effect from April 1, 2003. Justice Jagdish Bhalla, chief justice of the Himachal Pradesh high court, said that the government had agreed to open a Law University in the hill state."The decision would contribute towards providing quality law education in the state," he said.
Sunday, February 15, 2009
Hooda ने बांटी रेवडियाँ
बुढापा पेंशन 500 रूपये, विधवा पेंशन 550
बेरोजगारी भत्ता भी बढाया
लोकसभा चुनाव की तैयारी तेज़ करते हुए सीएम हुड्डा ने प्रदेश के बजट से पहले ही सभी वर्गों के लिए चुनावी तोहफों का एलान कर दिया। खास बात यह रही कि बजट में यह घोषणाएं शामिल नहीं हैं। बुढापा पेंशन को बढाकर पांच सौ रुपये कि घोषणा कर दी और इसी के साथ बेरोजगारी भत्ता और विधवा पेंशन में भी इजाफा करने कि घोषणा सीएम ने सदन में की। मुख्यमंत्री ने इस तरह अपनी ही सरकार के बजट को बौना साबित कर सरकार पर अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी। कुछ दिन पूर्व ही वित्त मंत्री बिरेंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पड़ की लडाई जारी रखने का एलान किया था। इस तरह सीएम ने उन्हें बौना साबित कर उसका जवाब दे दिया है। इस तरह कांग्रेस की लडाई ने एक नया रंग ले लिया है।
हुड्डा ओर से की गई घोषणाओं में पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकरता, बेसहारा बच्चे, विधवाएं, वरिष्ठ नागरिक तथा सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल है। इनके लिए लगभग 700 करोड़ रुपये की अनेक योजनाओं की घोषणा की हैं और ये सभी योजनाएं 1 अप्रैल से लागू होंगी। बुढ़ापा पेंशन 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये, विधवा पेंशन 350 रुपये से बढ़ाकर 550 रुपये, 70 प्रतिशत विकलांग व्यक्तियों का भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये, शत प्रतिशत विकलांग भत्ता 600 रुपये से बढ़ाकर 750 रुपये, बेसहारा बच्चों का मासिक भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये किया गया है। विज्ञान नहीं पढ़े 12वीं पास लोगों का बेरोजगारी भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये, विज्ञान पढ़े स्नातक युवकों का बेरोजगारी भत्ता 500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 750 रुपये, विज्ञान स्नातक बेरोजगार भत्ता 750 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये,12वीं पास सामान्य व विज्ञान शिक्षित युवतियों का बेरोजगारी भत्ता 450 रुपये से बढ़ाकर 900 रुपये, विज्ञान स्नातक तथा सामान्य स्नातक बेरोजगार महिलाओं का बेरोजगारी भत्ता 750 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह किया गया है। स्वतंत्रता सेनानी पेंशन में शामिल निर्धारित चिकित्सा भत्ते को 250 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 750 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। हुड्डा ने घोषणा की कि जिला परिषद के प्रधान का मानदेय 4000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 6000 रुपये, उप-प्रधान का मानदेय 3000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 4500 रुपये तथा सदस्य जिला परिषद का मानदेय 1000 से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की है। जो पहली अप्रैल 2009 से लागू होगी। इसी प्रकार पंचायत समिति के प्रधान का मानदेय 3000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 4500 रुपये प्रतिमाह तथा सदस्य पंचायत समिति का मानदेय 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। इतना ही नहीं सरपंच का मानदेय 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह तथा पंच का मासिक भत्ता 200 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। नगर निगम के मेयर का मानदेय 3000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह, वरिष्ठ उप-मेयर का मानदेय 2000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये, उप-मेयर का मानदेय 1500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह तथा पार्षद का मानदेय 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया नगर परिषद के प्रधान का मानदेय 2000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह, उप-प्रधान का मानदेय दोगुणा करते हुए 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की है। इसके साथ ही नगर परिषद के पार्षद का मानदेय भी 1000रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह किया। उन्होंने घोषणा की कि नगरपालिका के प्रधान को 1500 रुपये प्रतिमाह की अपेक्षा 2500 रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिया जाएगा जबकि उप-प्रधान का मानदेय दोगुणा करके 1000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। नगरपालिका सदस्य को 500 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 1000 रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिया जाएगा। हुड्डा ने घोषणा की कि चौकीदार का मानदेय 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह तथा वार्षिक वर्दी भत्ता 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह तथा सीटी, लाठी और बैटरी का वार्षिक भत्ता भी 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नंबरदारों का मानदेय भी 500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 750 रुपये प्रतिमाह कर दिया जाएगा। हुड्डा ने आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ताओं का मानदेय 500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की है और आंगनबाड़ी हैल्पर्स का मानदेय 400 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 750 रुपये प्रतिमाह कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा प्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में देश में प्रथम स्थान पर है और प्रदेश में दुग्ध उत्पादकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में सरकार द्वारा मिल्क सबसिडी प्रदान की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए हरियाणा सरकार द्वारा 50 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार द्वारा प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी अध्यापकों के लिए एक अलग से काडर बनाने का फैसला किया गया है और इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में 1000 अंग्रेजी अध्यापक नियुक्त किए जाएंगे। शहरी क्षेत्रों में मकानों की समस्या का समाधान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि शहरी क्षेत्रों में सरकार द्वारा जगाधरी, फरीदाबाद, पलवल, हिसार, सोनीपत तथा अम्बाला में 15000 मकान बनाए जाएंगे। उन्होंने क हा कि इसी प्रकार से शहरी क्षेत्रों के आसपास 15000 मकान प्राइवेट सेक्टरों में बनाए जा रहे हैं। इन्हीं मकानों की तरह बहादुरगढ, गुड़गांव, हिसार, जींद, कै थल , रोहतक तथा सिरसा में भी 16356 मकान बनाए गए हैं। इसी प्रकार प्राइवेट सैक्टरों में भी 15000 मकान बनाए जाएंगे।
बेरोजगारी भत्ता भी बढाया
लोकसभा चुनाव की तैयारी तेज़ करते हुए सीएम हुड्डा ने प्रदेश के बजट से पहले ही सभी वर्गों के लिए चुनावी तोहफों का एलान कर दिया। खास बात यह रही कि बजट में यह घोषणाएं शामिल नहीं हैं। बुढापा पेंशन को बढाकर पांच सौ रुपये कि घोषणा कर दी और इसी के साथ बेरोजगारी भत्ता और विधवा पेंशन में भी इजाफा करने कि घोषणा सीएम ने सदन में की। मुख्यमंत्री ने इस तरह अपनी ही सरकार के बजट को बौना साबित कर सरकार पर अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी। कुछ दिन पूर्व ही वित्त मंत्री बिरेंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पड़ की लडाई जारी रखने का एलान किया था। इस तरह सीएम ने उन्हें बौना साबित कर उसका जवाब दे दिया है। इस तरह कांग्रेस की लडाई ने एक नया रंग ले लिया है।
हुड्डा ओर से की गई घोषणाओं में पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकरता, बेसहारा बच्चे, विधवाएं, वरिष्ठ नागरिक तथा सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल है। इनके लिए लगभग 700 करोड़ रुपये की अनेक योजनाओं की घोषणा की हैं और ये सभी योजनाएं 1 अप्रैल से लागू होंगी। बुढ़ापा पेंशन 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये, विधवा पेंशन 350 रुपये से बढ़ाकर 550 रुपये, 70 प्रतिशत विकलांग व्यक्तियों का भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये, शत प्रतिशत विकलांग भत्ता 600 रुपये से बढ़ाकर 750 रुपये, बेसहारा बच्चों का मासिक भत्ता 100 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये किया गया है। विज्ञान नहीं पढ़े 12वीं पास लोगों का बेरोजगारी भत्ता 300 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये, विज्ञान पढ़े स्नातक युवकों का बेरोजगारी भत्ता 500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 750 रुपये, विज्ञान स्नातक बेरोजगार भत्ता 750 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये,12वीं पास सामान्य व विज्ञान शिक्षित युवतियों का बेरोजगारी भत्ता 450 रुपये से बढ़ाकर 900 रुपये, विज्ञान स्नातक तथा सामान्य स्नातक बेरोजगार महिलाओं का बेरोजगारी भत्ता 750 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह किया गया है। स्वतंत्रता सेनानी पेंशन में शामिल निर्धारित चिकित्सा भत्ते को 250 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 750 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है। हुड्डा ने घोषणा की कि जिला परिषद के प्रधान का मानदेय 4000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 6000 रुपये, उप-प्रधान का मानदेय 3000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 4500 रुपये तथा सदस्य जिला परिषद का मानदेय 1000 से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की है। जो पहली अप्रैल 2009 से लागू होगी। इसी प्रकार पंचायत समिति के प्रधान का मानदेय 3000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 4500 रुपये प्रतिमाह तथा सदस्य पंचायत समिति का मानदेय 500 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। इतना ही नहीं सरपंच का मानदेय 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह तथा पंच का मासिक भत्ता 200 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। नगर निगम के मेयर का मानदेय 3000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 5000 रुपये प्रतिमाह, वरिष्ठ उप-मेयर का मानदेय 2000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये, उप-मेयर का मानदेय 1500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह तथा पार्षद का मानदेय 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया नगर परिषद के प्रधान का मानदेय 2000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह, उप-प्रधान का मानदेय दोगुणा करते हुए 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की है। इसके साथ ही नगर परिषद के पार्षद का मानदेय भी 1000रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह किया। उन्होंने घोषणा की कि नगरपालिका के प्रधान को 1500 रुपये प्रतिमाह की अपेक्षा 2500 रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिया जाएगा जबकि उप-प्रधान का मानदेय दोगुणा करके 1000 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह किया गया है। नगरपालिका सदस्य को 500 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 1000 रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिया जाएगा। हुड्डा ने घोषणा की कि चौकीदार का मानदेय 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह तथा वार्षिक वर्दी भत्ता 1000 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह तथा सीटी, लाठी और बैटरी का वार्षिक भत्ता भी 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये किया जाएगा। उन्होंने बताया कि नंबरदारों का मानदेय भी 500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 750 रुपये प्रतिमाह कर दिया जाएगा। हुड्डा ने आंगनबाड़ी कार्यकत्र्ताओं का मानदेय 500 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की है और आंगनबाड़ी हैल्पर्स का मानदेय 400 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 750 रुपये प्रतिमाह कर दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा प्रदेश दुग्ध उत्पादन के मामले में देश में प्रथम स्थान पर है और प्रदेश में दुग्ध उत्पादकों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि राज्य में सरकार द्वारा मिल्क सबसिडी प्रदान की जाएगी। इस उद्देश्य के लिए हरियाणा सरकार द्वारा 50 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकार द्वारा प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी अध्यापकों के लिए एक अलग से काडर बनाने का फैसला किया गया है और इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में 1000 अंग्रेजी अध्यापक नियुक्त किए जाएंगे। शहरी क्षेत्रों में मकानों की समस्या का समाधान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि शहरी क्षेत्रों में सरकार द्वारा जगाधरी, फरीदाबाद, पलवल, हिसार, सोनीपत तथा अम्बाला में 15000 मकान बनाए जाएंगे। उन्होंने क हा कि इसी प्रकार से शहरी क्षेत्रों के आसपास 15000 मकान प्राइवेट सेक्टरों में बनाए जा रहे हैं। इन्हीं मकानों की तरह बहादुरगढ, गुड़गांव, हिसार, जींद, कै थल , रोहतक तथा सिरसा में भी 16356 मकान बनाए गए हैं। इसी प्रकार प्राइवेट सैक्टरों में भी 15000 मकान बनाए जाएंगे।
Thursday, February 5, 2009
Craft व बाल केंद्रों की ग्रांट बंद
नारी सशक्तिकरण वर्ष खत्म होते ही प्रदेश सरकार ने ग्रामीण इलाकों में चल रहे महिला Craft Center व Child Center की अनुदान राशि बंद कर दी है। राज्य के 33 बाल केंद्रों और 29 महिला क्राफ्ट सेंटरों को एक साल से अनुदान का एक रुपया भी हासिल नहीं हुआ है। अनुदान नहीं मिलने के बावजूद हालांकि कोई सेंटर बंद नहीं हुआ, लेकिन सुविधाओं के नाम पर इनमें मात्र खानापूर्ति की जा रही है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग के तहत प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 29 क्राफ्ट सेंटर और 33 क्रैच काम कर रहे हैं। इनकी देखभाल के लिए अलग से भारतीय ग्रामीण महिला संघ बनाया गया है। ग्रामीण महिला संघ को केंद्र व राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त है। क्राफ्ट सेंटर पर महिलाओं को हस्त शिल्पकला का प्रशिक्षण दिया जाता है, जबकि ग्रामीण क्रैच में पांच साल तक के बच्चों को रखे जाने का प्रावधान है। इन सेंटर को राज्य सरकार ने अनुदान राशि देना बंद कर दिया है। महिला क्राफ्ट सेंटरों को एक साल से तथा बाल केंद्रों को दो साल से अनुदान राशि नहीं मिल रही है। अनुदान बंद होने के कारण देहात में संचालित यह केंद्र औपचारिकता बनकर रह गए हैं। सरकार की अनदेखी का असर यह हुआ कि इस बार क्राफ्ट व बाल केंद्रों के संचालन के लिए मात्र 37 लाख रुपये का बजट तैयार किया गया है। भारतीय ग्रामीण महिला संघ की आयोजन सचिव प्रतिमा के अनुसार बजट की कमी के चलते क्राफ्ट सेंटरों व बाल केंद्रों के संचालन में कोई कमी नहीं आने दी जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि इन दोनों केंद्रों के प्रति राज्य सरकार का रवैया उदासीन है। फतेहाबाद व सिरसा में दो परिवार परामर्श केंद्रों के बेहतर संचालन का दावा करते हुए प्रतिमा ने बताया कि एक अप्रैल से पंचकूला के रामगढ़ में फ्लोरी-कल्चर व वर्मी कंपोस्ट बनाने की नर्सरी आरंभ की जाएगी। फतेहाबाद में कंप्यूटर सेंटर और करनाल में ब्यूटीशियन ट्रेनिंग सेंटर खोले जाने की योजना है।
Friday, January 23, 2009
Loan Recovery policy में बदलाव
चंडीगढ़ : सरकार ने वर्ष 2008-09 के दौरान सरकारी कर्मचारियों को गृह निर्माण ऋण, मोटर कार, मोटरसाईकिल, स्कूटर, मोपेड, विवाह व कम्प्यूटर अग्रिम ऋणों की दरें पहले अग्रिम ऋण के लिए आठ प्रतिशत एवं दूसरे अग्रिम ऋण पर नौ प्रतिशत की दर से वसूली करने का निर्णय लिया है। इसी प्रकार, साईकिल के लिए ये दरें सात प्रतिशत व आठ प्रतिशत होंगी। किसी ऋण के दुरूपयोग के मामले में आवेदक से 10 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज जूर्माना वसूला जाएगा। सरकार ने सामान्य भविष्य निधि पर जमा राशि के लिए भी पहली अप्रैल, 2008 से ब्याज दर आठ प्रतिशत वार्षिक निर्धारित की है। ब्याज की यह दर वित्त वर्ष 2008-09 के दौरान प्रभावी रहेगी। सरकार ने नेत्रहीन तथा शारीरिक रूप से विकलांग सरकारी कर्मचारियों को दिए जाने वाले मूल वेतन का 10 प्रतिशत या अधिकतम 600 रुपये मासिक वाहन भत्ते की दर भी पहली जनवरी, 2009 से अधिकतम 1000 रुपये मासिक या मूल वेतन का 10 प्रतिशत लागू करने का निर्णय लिया है।
हर किसान व मजदूर का होगा बीमा
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि प्रदेश सरकार किसान-मजदूर बीमा योजना शुरू कर रही है। इस योजना के तहत किसान व खेतिहर मजदूर का बीमा होगा और प्रीमियम मार्केटिंग बोर्ड देगा। इस बारे में बीमा कंपनियों से बात चल रही है। खेती के दौरान अंग-भंग होने पर एक लाख रुपये तक दिए जाएंगे। बता दें कि पहले यह राशि अधिकतम 50 हजार रुपये थी।
सीएम ने कहा कि प्रदेश का किसान ठाठ कर रहा है। ये ठाठ भी हमनं कराए। किसान के सिर अब कर्ज का बोझ न के बराबर है। हुड्डा ने कहा कि गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से बात की है। वह चाहते है, समर्थन मूल्य में दो सौ रुपये की बढ़ोतरी हो। उल्लेखनीय है, इस समय गेहूं का समर्थन मूल्य एक हजार रुपये है। हम चाहते है कि बहादुरगढ़ के बाद मेट्रो रोहतक तक पहुंचे। यहां मिलिट्री स्कूल लाने के भी प्रयास चल रहे हैं।
सीएम ने कहा कि प्रदेश का किसान ठाठ कर रहा है। ये ठाठ भी हमनं कराए। किसान के सिर अब कर्ज का बोझ न के बराबर है। हुड्डा ने कहा कि गेहूं का समर्थन मूल्य बढ़ाने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से बात की है। वह चाहते है, समर्थन मूल्य में दो सौ रुपये की बढ़ोतरी हो। उल्लेखनीय है, इस समय गेहूं का समर्थन मूल्य एक हजार रुपये है। हम चाहते है कि बहादुरगढ़ के बाद मेट्रो रोहतक तक पहुंचे। यहां मिलिट्री स्कूल लाने के भी प्रयास चल रहे हैं।
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