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Friday, November 20, 2009

GJU ने पीएचडी की 107 सीटों पर मांगे आवेदन

गुरु जंभेश्वर विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJU) हिसार के 14 विभागों में डॉक्टरेट ऑफ फिलोस्फी (पीएचडी) की 107 सीटों के लिए आवेदन मांगे हैं। 15 पीएचडी स्कॉलर्स को 18 हजार रुपए प्रतिमाह की स्कॉलरशिप व पांच हजार रुपए कंटीजेंसी खर्चा भी दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त 14 विभागों में पांच हजार रुपए प्रतिमाह की एक-एक विश्वविद्यालय रिसर्च स्कॉलरशिप भी दी जाएगी। विद्यार्थियों का चयन एक प्रवेश परीक्षा के द्वारा किया जाएगा जो कि विश्वविद्यालय के संबंधित विभागों में 21 दिसंबर 2009 को आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा दो घंटे की होगी। इच्छुक छात्र विश्वविद्यालय में अपना आवेदन संबंधित विभाग में 10 दिसंबर 2009 तक आवेदन कर सकते हैं। उन्होंने आगे बताया कि आवेदन पत्र व अधिक जानकारी के लिए विद्यार्थी विश्वविद्यालय की वैबसाईट www.gju.ernit.in देख सकते हैं।
इन-इन विषयों पर हैं सीटें खाली विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर आरएस जागलान ने बताया कि इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग में 1, पर्यावरण विज्ञान तथा अभियांत्रिकी में 10, रसायन में 11, गणित में 6, भौतिकी में 8, खाद्य तकनीक में 6, बायो एंड नैनो टेक्नालाजी में 8, फार्मास्युटिकल साइंस में 2, मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 5, अप्लाईड साईकॉलोजी में 10, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में 6, कम्यूनिकेशन मेनैजमेंट एंड टेक्नालाजी में 2, एडवर्टाईजिंग मेनैजमेंट एंड पब्लिक रिलेशनस में 2 व हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस में 30 सीटों पर पीएचडी में दाखिले के लिए आवेदन मांगे गए हैं।

Tuesday, June 23, 2009

कुवि ने 248 करोड़ का बजट किया पास

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने सोमवार को 248 करोड़ 65 लाख रुपये का बजट पास किया। विभिन्न मदों से कुवि साल भर में 174 करोड़ 38 लाख रुपये कमाएगी, जबकि 74 करोड़ 26 लाख रुपये अनुदान के जरिये जुटाए जाएंगे। कोर्ट की बैठक मुख्य तौर पर बजट के लिए आयोजित की गई थी। सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से इसे पारित कर दिया। स्नातकोत्तर के नियमित व पत्राचार कोर्साें में एकरूपता पर भी बैठक में विचार-विमर्श किया गया। कुलपति ने दोनों पाठयक्रमों में एकरूपता लाने का आश्वासन दिया। साथ ही कुवि की कार्यकारिणी परिषद, अकादमिक परिषद व कोर्ट में शिक्षकों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने को लेकर गठित समिति की संस्तुतियों पर भी कोर्ट ने विचार किया है। महाविद्यालयों के अधिष्ठाता प्रो. टीआर कुंडू, कुटा अध्यक्ष प्रो. नरविंद्र सिंह कौशल, हरियाणा कालेज टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव डा. राजवीर पराशर, एसडी महाविद्यालय पानीपत के प्राचार्य केएस ढिल्लों व राजकीय महाविद्यालय करनाल के प्राचार्य राधेश्याम शर्मा सहित समिति के सभी सदस्यों ने इन निकायों में शिक्षकों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की संस्तुति की है। कोर्ट व अकादमिक परिषद के लिए राजकीय महाविद्यालयों व व्यवसायिक संस्थानों और कालेजों का एक-एक अलग चुनाव क्षेत्र बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा कार्यकारिणी परिषद के लिए भी संबद्ध महाविद्यालयों व मेंटेन्ड कालेजों और सेल्फ फाइनेंस संस्थानों से एक-एक चुनाव क्षेत्र बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।

Monday, May 11, 2009

कालेजों में भी सेमेस्टर प्रणाली

--अब कालेज ही देंगे मार्कशीट --कालेज खुद कराएंगे एड-आन कोर्सेज की परीक्षा
कालेजों में एड-आन कोर्सेज की परीक्षाएं संबद्ध कालेजों द्वारा स्वयं कराई जाएंगी तथा स्वयं ही प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। यह निर्णय महर्षि दयानंद विवि की कार्यकारि समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में विवि के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनर्नियुक्ति देने, स्नातक कक्षाओं (बी.काम, बी.एससी) में सेमेस्टर लागू करने आदि अनेक अहम निर्णय लिए गए। एमडी यूनिवर्सिटी की एक्जीक्यूटिव कमेटी (ईसी) की शनिवार को हुई 204वीं बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। बैठक में यूनिवर्सिटी से संबद्ध कालेजों तथा विश्र्वविद्यालयों तथा शैक्षणिक विभागों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में अध्यापन एवं परीक्षा प्रणाली में सेमेस्टर स्कीम लागू करने का निर्णय लिया गया। मदवि से संबंधित महाविद्यालयों में स्नातकीय स्तर पर विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों में आगामी सत्र से सेमेस्टर प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया। यूनिवर्सिटी से संबंध कालेजों की स्नातकीय स्तर पर कंप्यूटर शिक्षा लागू करने का अहम निर्णय लिया गया। बैठक में संबद्ध कालेजों से एड-आन कोर्स के लिए परीक्षा संचालित करने का काम संबंधित कालेज को सौंपने का निर्णय लिया। संबंधित महाविद्यालय विश्र्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों के तहत एड-ऑन कोर्स का प्रमाण पत्र भी जारी कर सकेंगे। इस संयुक्त प्रमाण पत्र पर संबंधित महाविद्यालय तथा एमडीयू विश्र्वविद्यालय दोनों का नाम उल्लेखित होगा। कार्यकारी परिषद ने एम.ए, एम.काम तथा एम.एससी (सेमेस्टर स्कीम) परीक्षाओं के नए अध्यादेश को भी मंजूरी दे दी। कार्यकारी परिषद (ईसी) में दो जून 2008 से प्रदेश के सभी मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथी, फार्मेसी, नर्सिग तथा फिजियोथैरेपी कालेजों की संबद्धता पं.बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी आफ हैल्थ साइसेंज, रोहतक से करने के निर्णय का संज्ञान किया। विश्र्वविद्यालय से संबंध एपीजे कालेज आफ इंजीनियरिंग, सोहना तथा बीआरसीएम कालेज आफ इंजीनियरिंग, बहल को बीटेक पाठ्यक्रम के लिए स्थायी संबद्धता देने का निर्णय शैक्षणिक परिषद की बैठक में लिया गया। बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत सेवानिवृत्त होने वाले गैर शैक्षणिक कर्मियों की संविदा आधार पर पुनर्नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी। प्रस्ताव के तहत सेवानिवृत्त कर्मियों की पुनर्नियुक्ति के नियम तय किए गए हैं। बैठक में यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलोजी के निदेशक पद का दर्जा प्रोफेसर पद के समतुल्य करने का भी निर्णय लिया। बैठक में इमसार के रीडर डा. एच.जे घोष को कैरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोफसर पद पर पदोन्नत करने की चयन समिति की अनुशंसा को स्वीकृत कर लिया। इसके अतिरिक्त बैठक में कई प्राध्यापकों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों/संगोष्ठियों में भाग लेने के आवेदन संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। राज्य सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर उच्चतर शिक्षा आयुक्त ज्योति अरोड़ा ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता वाइस चांसलर डा. आरपी हुड्डा ने की। रजिस्ट्रार डा. एसपी वत्स ने बतौर सचिव बैठक में भाग लिया। बैठक में ई.सी शैक्षणिक मामलों के अधिष्ठाता प्रो. सुरेंद्र कुमार, सदस्य डा.एसपी दहिया, डा. एसपी खटकड़, डा. नत्थी सिंह, डा. एसएन मिश्रा, डा. एलके बंसल, डा. एसके हुड्डा, डा. जेपी यादव, डा. राजकुमार, अनीता सिंह, प्रो. फिरोज अहमद, प्रो. जावेद हुसैन मौजूद रहे।

Saturday, March 21, 2009

चारों विश्वविद्यालयों का एकेडमिक कैलेंडर एक

प्रदेश के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, चौ. देवी लाल विश्वविद्यालय व खानपुर महिला विश्वविद्यालय का एकेडमिक कैलेंडर अगले सत्र से एक होगा। इस कैलेंडर का विमोचन जल्द किया जाएगा। कुरुक्षेत्र विवि में पिछले दिनों हुई चारों यूनिवर्सिटी के अधिकारियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रदेश की प्रमुख विश्वविद्यालयों में एक जैसी शिक्षा, परीक्षा का समय, शैक्षणिक दिवस और दाखिले का समय एक करने की तैयारियां की जा रही हैं। एकेडमिक कैलेंडर एक होने से विद्यार्थियों को दाखिला लेने व माइग्रेशन कराने संबंधी मामलों में काफी फायदा होगा। पहले एडमिशन के समय अलग-अलग होने के कारण विद्यार्थी एक समय में एक ही विश्वविद्यालय में आवेदन कर पाते थे। अब किसी का ट्रांसफर हो जाने, अच्छी फैकल्टी या अन्य कारणों से विश्वविद्यालय बदलना भी काफी आसान हो जाएगा। आगामी सत्र से लागू हो रहे सेमेस्टर सिस्टम में पाठ्यक्रम को पहले ही एक किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की तर्ज पर ही मदवि में कंप्यूटर एजुकेशन लागू किया जा रहा है। इस संदर्भ में कुरुक्षेत्र में हुई बैठक में मदवि की ओर से डीन एकेडमिक अफेयर डा. सुरेंद्र कुमार, एकेडमिक ब्रांच के इंचार्ज सुखबीर सिंह ने भाग लिया।

Wednesday, January 28, 2009

Kurukshetra University के दूरस्थ शिक्षा विभाग का फर्जीवाड़ा

दूरस्थ शिक्षा परिषद विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (UGC) एवं अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से संचालित दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के करीब डेढ़ दर्जन स्नातक एवं स्नातकोत्तार तकनीकी कोर्सो को कभी अनुमोदित नहीं किया है। इसमें शिक्षा से जुड़े कई दूसरे कोर्स भी इस ऐप्रूवल से बाहर है। शिक्षा से जुड़े इस बड़े सनसनीखेज मामले ने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित तकनीकी शिक्षण कार्यक्रम की पोल पूरी तरह से खोल कर रख दी है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने कलायत के गाव मटौर निवासी नरेश कुमार की ओर से सूचना अधिकार कानून के तहत मागी गई जानकारी पर हलचल मचा दी है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के सचिव की ओर से दी गई सूचना के अनुसार केयूके में चलाए जा रहे डेढ़ दर्जन पाठयक्रम अभी अनुमोदित नहीं हैं।

यह पाठयक्रम हैं :मास्टर आफ कंप्यूटर एप्लीकेशन , एम।एस।सी, कंप्यूटर साइस (साफ्टवेयर), एम।एस।सी कंप्यूटर साइस (एस।डब्लयू),मास्टर आफ बिजनेस मैनेजमेंट (एम.बी.ए), मास्टर आफ लाइब्रेरी एंड इनफरमेशन साइस, बेचलर आफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (तीनवर्षीय), बी.एस.सी इन इटरनल साइस (तीनवर्षीय), बी.एस.सी इन कंप्यूटर हार्ड वेयर एंड न्यू वर्क इजीनियरिग (तीनवर्षीय), बेचलर आफ इनफरमेशन एंड मैनेजमेंट (तीनवर्षीय), बेचलर आफ लाइब्रेरी एंड इनफरमेशन साइस (तीनवर्षीय), पी.जी.डिप्लोमा इन टूरिजम एंड होटल मैनेजमेंट (एकवर्षीय), पी.जी.डिप्लोमा इन कंप्यूटर ऐप्लीकेशन (पी.जी.डी.सी.ए)

इसके साथ-साथ कुछ दूसरे रोज परख संचालित तकनीकी कार्यक्रमों को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने जब अनुमोदित ही नहीं किया? उन हजारों विद्यार्थियों के भी होश उड़े है जिन्होंने पूर्व में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के तहत विभिन्न डिग्रिया और डिप्लोमा लिए है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के उप निदेशक एवं जन सूचना अधिकारी की मानें तो देश में अधिकाश राज्यों की सरकारी नौकरियों के लिए ये डिग्रिया मान्य नहीं है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का दूरस्थ विभाग उसके लिए एक बड़ा कमाऊ पूत है। विभाग द्वारा संचालित कार्यक्रमों के जरिए हर वर्ष घर बैठकर शिक्षा प्राप्त करने वालो से बड़ी राशि फीस के नाम पर वसूली जाती है। केवल इतना ही नहीं बल्कि विश्वविद्यालय ने देश व राज्य के विभिन्न हिस्सों में तकनीकी शिक्षा कार्यक्रमों को संचालित करने के लिए निजी हाथों में भी कमान दे रखी है। इन-फ्रेचाईज में बड़ी संख्या में विद्यार्थी अध्ययनरत है।