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Monday, August 10, 2009

मान के लिए एक और प्रेमी जोड़ा बलिदान

ज्जर के सिवाना से फरार प्रेमी युगल के शव रविवार को खेतों में पेड़ से लटकते मिले। पहली नज़र में यह आत्महत्या का मामला नज़र आया लेकिन जब जांच आगे बढ़ी तो सामने आया वह सच जिसे सुन इंसानों की क्या शैतान की भी रूह कांप उठे सम्मान पंचायती परंपरा के नाम पर उनके परिजनों ने ही उनकी मौत का फरमान सुना दिया और फिर उन्हें पीट-पीट कर मार डाला।

दोनों पक्षों ने बैठक कर किसी भी तरह से युगल को ढूंढ कर उन्हें मौत की सजा देने का निर्णय कर लिया। इसके बाद दोनों के परिजनों ने युगल को भरोसा दिलाया कि वे गांव लौट आएं और उन्हें कुछ भी नहीं कहा जाएगा। इसके बाद युगल को यह कहकर गांव सिवाना से काहनौर जाने वाले मार्ग पर बुलाया गया कि इस मार्ग से दोनों अपने-अपने घरों को लौट जाएंगे। युगल को अपने परिजनों पर भरोसा करना भारी पड़ गया और तय योजना के मुताबिक दोनों पक्षों के लोगों ने मिलकर लगभग आधी रात को गांव के छोटे जोहड़ के समीप राड से गुप्तांगों पर वार कर गला घोंटकर दोनों को मौत की नींद सुला दिया।

गांव सिवाना से संदीप पुत्र नर सिंह गांव की ही एक निजी स्कूल में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली निशा (काल्पनिक) के साथ 1 अगस्त को फरार हो गया था। इसके कारण लड़की के पिता रामकुमार ने बेरी पुलिस थाने में लड़के के खिलाफ अपहरण का मामला भी दर्ज कराया था। पुलिस ने लड़के के खिलाफ मामला दर्ज करने के साथ युगल की तलाश भी की थी। रविवार सुबह अचानक युगल का शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। जिस खेत में शव पेड़ पर झूलते पाए गए, वह खेत भी मृतक के परिवार का ही है।

क्या था मामला

गांव सिवाना के प्रेमी युगल की मौत का मामला गोत्र विवाद का होकर ग्रामीण समाज की सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपराओं से जुड़ा हुआ था। इसके चलते एक ही गांव के रहने वाले सभी लड़के-लड़कियों का रिश्ता भाई-बहन का माना जाता है। मोनिका लठवाल गोत्र से संबंध रखती थी और संदीप कादियान गोत्र से संबंधित था। लेकिन एक ही गांव के निवासी होने के चलते सामाजिक परंपराओं के अनुसार उनका भाई-बहन का रिश्ता था और इस परंपरा को तोडऩे की कीमत उन्हें अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

सर्वखाप पंचायत ने निपटाया मामला

ढराणा गोत्र विवाद में बेरी में रविवार को आयोजित सर्व खाप महापंचायत ने रविंद्र को अपनी पत्नी शिल्पा के साथ आजीवन और उसके पिता रोहताश गहलोत को तीन माह के लिए ढराणा गांव से बाहर रहने का फैसला सुना दिया। साथ ही रोहताश के भाइयों नसीब व वेदप्रकाश और कादियान बाहुल्य गांव में अपनी बेटी का रिश्ता करने वाले शिल्पा के पिता वेदप्रकाश निवासी सिवाह (पानीपत) के परिवार पर भी महापंचायत ने एक-एक कौड़ी का जुर्माना लगाने तथा किसी भी पक्ष द्वारा फैसला न माने जाने पर जातीय बहिष्कार का निर्णय भी किया। उधर महापंचायत के फैसले को मानते हुए देर शाम रोहतास ने अपने परिवार के साथ गांव छोड़ दिया। वे तीन माह बाद गांव लौटेंगे। इसके साथ ही गहलोत परिवार द्वारा अपने सभी मुकदमों को वापस लेने का फैसला भी दिया गया है।
कादियान खाप के बुलावे पर बेरी के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में रविवार को सर्वखाप महापंचायत हुई। दहिया खाप के प्रधान सुभाष दहिया ने महापंचायत की अध्यक्षता की। वहीं सर्वखाप महापंचायत में कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट भी हुई और एक छायाकार के कैमरे को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। गांव ढराणा निवासी रोहतास गहलोत के पुत्र रविंद्र द्वारा कादियान गोत्र की लड़की शिल्पा के साथ शादी करने से भड़की कादियान खाप ने रविवार को सर्व खाप पंचायत बुलाई थी। महापंचायत में 50 से अधिक खापों व जाट समाज के संगठनों के सैकड़ों प्रतिनिधियों के अलावा कादियान खाप से जुड़े लगभग तीन हजार लोगों ने भाग लिया।

सर्वखाप महापंचायत में दिन भर चली जिरह के दौरान कई बार नौबत टकराव तक आ गई, जिसके चलते कादियान खाप से जुड़े लोगों ने अन्य खापों के कई प्रतिनिधियों के साथ मारपीट भी की। हालांकि बुजुर्गो व मौजिज लोगों के बीच-बचाव के बाद पंचायत की कार्रवाई सुचारु हो पाई। महापंचायत की कार्रवाई आरंभ होते ही सभी खापों से एक-एक प्रतिनिधियों की कमेटी बनाई गई और कमेटी के निर्णय को मानने पर सहमति भी हुई। कमेटी के प्रतिनिधियों द्वारा फैसला सुनाते ही कादियान खाप से जुड़े सैकड़ों व्यक्ति भड़क गए और फैसले को न मानते हुए मारपीट पर उतारू हो गए। महापंचायत के मद्देनजर जिला प्रशासन ने गहलोत परिवार की सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी कर दिए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने भी गांव ढराणा का दौरा किया। महापंचायत में दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि प्रदेशों से आए प्रतिनिधियों के अलावा अहलावत 27 खाप के जय सिंह, कथूरा बारह से भले राम, गुलिया खाप से सतबीर, दहिया खाप के सचिव रणजीत सिंह, गहलावत के जगदीश मितराऊ आदि प्रतिनिधि भी मौजूद थे। कादियान बारहा खाप की अगुवाई कर रहे राज सिंह कादियान ने सर्वखाप महापंचायत के फैसले को माने जाने की बात कहते हुए सोमवार को एक बार फिर फैसले की समीक्षा के लिए धरनास्थल पर पंचायत करने की बात कही। फैसले के बावजूद धरनास्थल पर खाप से जुड़े लगभग चार दर्जन व्यक्ति मौजूद रहे। महापंचायत में वक्ताओं द्वारा जब-जब भी दोनों पक्षों की बात सुनकर फैसला दिए जाने की बात कही गई तो कादियान खाप से जुड़े व्यक्ति भड़कते नजर आए। इतना ही नहीं फैसले के विरोध में कादियान खाप के लोगों द्वारा किए गए हमले में अहलावत खाप के जगदीप अहलावत, गहलावत खाप के वीरेंद्र एडवोकेट, गांव सिवाना के दिनेश आदि को भी चोट पहुंची। अहलावत खाप के जगदीप अहलावत को जब एक गाड़ी में वहां से निकालने की कोशिश की जा रही थी तो उसे मारने पर उतारू भीड़ से उसे बचाने के दौरान पुलिस विभाग के एसआई पोहप सिंह व सिपाही राजबीर के साथ भी लोगों ने मारपीट की।

Sunday, July 19, 2009

परम्परा के नाम पर सड़कों पर उत्पात

खाप का ढराणा पर हमला, 18घायल
लाठियों व पत्थरों से लेस भीड़ पहुंच गई थी पीडि़त परिवार के घर के पास

लाठियों, डंडों और पत्थरों से लेस हजारों कि भीड़ परम्परा के नाम पर सड़कों और गांव कि गलियों में उत्पात मचाती रही...हर और दहशत....गहलोत परिवार और पूरा गांव घर में दुबका रहा लेकिन पुलिस और प्रशासन हालातन बिगड़ने देने कि दुहाई के नाम पर हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। यह सब वहां हो रहा था, जहाँ से स्वयं सीएम का बेटा सांसद हैं और हुड्डा स्वयं चार बार सांसद के रूप में उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। मीडिया कर्मियों को पुलिस के सामने पकड़ कर पीटा गया। कैमरे तोड़ दिए गए, फ़ोन और पर्स छीन लिए गए। खुन्नस बस इतनी थी की मीडिया पंचायत के तुगलकी फरमान के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत दिखाई थी। हमलावर मीडियाकर्मियों को पकड़कर पीटते रहे और पुलिस खड़ी तमाशा देखती रही।

लेकिन जब ग्रामीणों के हाथ पुलिस के गिरेबान पर जा पहुँचे और पुलिस दल पर भी हमला बोल दिया गया। तब पुलिस ने लाठीचार्ज का आदेश दे दिया। उसके बाद आंसू गैस छोड़ी गई और हवाई फायरिंग की गई। तब तक नायब तहसीलदार समेत डेढ़ दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो चुके थे।

ढराणा गोत्र विवाद के मामले में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही व अदूरदर्शिता के चलते रविवार को स्थिति विस्फोटक बन गई। गांव दूबलधन में कादियान खाप से जुड़े लोगों ने बैठक कर लाठियों व पत्थरों से लैस होकर गांव ढराणा की ओर कूच कर दिया और गांव में पीडि़त परिवार पर हमला बोल दिया। पीडि़त परिवार के मकान के पास खाप से जुड़े लोगों व पुलिसकर्मियों में जमकर पत्थरबाजी व लाठियां चलीं। इस टकराव में पीडि़त परिवार के मोहल्ले के लोग भी परिवार के पक्ष में उतर आए। स्थिति बेकाबू होने के बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े व हवाई फायर के साथ लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। घटना में बेरी के नायब तहसीलदार सहित 18 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। देर शाम तक गांव ढराणा व दूबलधन में तनाव बरकरार था और दोनों जगह पर पंचायत जारी थी। गोत्र विवाद में पंचायत अब भी अपने रुख पर कायम है और कादियान खाप के प्रधान कैप्टन राजसिंह कादियान के नेतृत्व में ग्रामीणों ने ढराणा के सरकारी स्कूल में डेरा डाल दिया है। उनका कहना है कि गहलोत परिवारों के गांव छोडऩे के बाद ही वे वहां से हटेंगे। इसके लिए बाकायदा उन्होंने स्कूल के प्रांगण में ही खाना बनाना शुरू कर दिया है।

पिछले सप्ताह भर से एक तरह से नजरबंदी में जी रहे पीडि़त परिवार के लोगों ने सायं के समय भय के चलते गांव छोडऩे का निर्णय कर लिया था लेकिन गांव के अनेक लोगों व खाप से जुड़े कुछ बुद्धिजीवी लोगों के आग्रह पर उन्होंने पलायन के लिए बांधा गया सामान वापस रख दिया। इससे पूर्व शनिवार को बेरी की पंचायत में किए गए निर्णय के अनुसार कादियान खाप ने रविवार सुबह बेरी के राजकीय कन्या वरिष्ठï माध्यमिक विद्यालय में खाप की महापंचायत का आयोजन किया। इसके लिए बाकायदा खाप से जुड़े सभी गांवों में लाउडस्पीकर के माध्यम से खाप की इज्जत के नाम पर महापंचायत में शामिल होने का आह्वान किया गया। लगभग एक घंटे चली महापंचायत में गांव ढराणा में पहुंचकर पीडि़त परिवारों पर हमला बोलकर जबरदस्ती उन्हें गांव से खदेडऩे का निर्णय किया गया। महापंचायत के बाद खाप से जुड़े लोग ट्रैक्टरों व अन्य वाहनों में लाठियों व पत्थरों आदि से लैस होकर गांव ढराणा की ओर चल पड़े। रास्ते में मीडियाकर्मियों को निशाना बनाकर पुलिस के हर अवरोध को आसानी से पार करते हुए भीड़ गांव ढऱाणा में पहुंच गई। गांव में गहलोत परिवार के मकान के पास जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो भीड़ ने पत्थरों व लाठियों से हमला बोल दिया। इसके बाद पीडि़त परिवार के मोहल्ले के अनेक परिवारों के सदस्य भी अपने मकानों की छत पर चढ़ गए और उन्होंने भी खाप के लोगों पर पथराव शुरू कर दिया। लगभग आधे घंटे हुई पत्थरबाजी, हवाई फायर कर, आंसू गैस के गोले छोड़ कर व लाठीचार्ज करने के बाद पुलिस भीड़ को तितर-बितर करने में कामयाब हो गई। प्रशासन की ओर से भारी पुलिस बल मौके पर बुला लिया गया। इतना ही नहीं रिजर्व पुलिस बल को भी बुला लिया गया था। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भादसं की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। नायब तहसीलदार समेत सात पीजीआई में भर्ती : रोहतक से जागरण संवाददाता के अनुसार नायब तहसीलदार प्रमोद चहल, महिला पुलिसकर्मी सरला, पुलिसकर्मी उरमेज सिंह, राजेश कुमार, नरेंद्र, कर्मवीर व ओमप्रकाश को पीजीआई में दाखिल कराया गया है। घायलों के सिर, मुंह व शरीर के अन्य अंगों पर गंभीर चोटें होने के कारण उन्हें विभिन्न विभागों में उपचार के लिए भेजा गया।

Thursday, July 16, 2009

पंचायत का तुगलकी फरमान

शादी न तोड़ने पर गांव छोड़ने का फरमान
पंचायत ने जारी किया फतवा
सरकार और पुलिस मौन
झज्जर के गांव में दम्पति ने तलाक लेने से मना किया तो पंचायत ने लड़के के परिवार के सभी घरों को गांव छोड़ने का फरमान सुना दिया। उनका कसूर सिर्फ़ इतना था कि उन्होंने अपने बेटे कि शादी उस जाति में करने कि गुस्ताखी की जिस जाति का उस गांव में दबदबा है और यह उस पंचायत को सहन नही हुआ। पंचायती परम्पराओं के नाम पर दम्पति की खुशियों में तो ग्रहण लग ही गया है, उनके रिश्तेदारों के समक्ष भी उजड़ने की नौबत आ गई है। ख़ास बात है कि जिला प्रशासन और पुलिस के साथ पूरी प्रदेश सरकार इस मसले पर सिर्फ़ दूर बैठ कर तमाशा देख रहे हैं।
ढराणा गांव के Rohtas Gahlot ने अपने बेटे रविन्द्र कि शादी पानीपत जिले के गांव शिवाह में कादियान परिवार में की थी। ढराणा गांव कादियान बहुल है। और इसी जाति कि गांव में बहु आना कादियान खाप को नागवार गुजरा और रोहतास को अपने बेटे और बहू का तलाक करवाने का आदेश सुना दिया। (12 July) को बेरी में खाप की पंचायत हुई और गहलोत परिवारों को तीन दिन का समय दिया गया। साथ ही तलाक न होने पर जमीन जायदाद बेचकर गांव छोड़ने का आदेश दिया गया।
बुधवार (15 July) तक गहलोत परिवार एक बार टूटता दिखाई पड़ा और अपनी सम्पति और जायदाद बचाने के लिए तलाक देने पर राजी को गए, लेकिन लड़की शिल्पा और उसके परिवार द्वारा यह फरमान ठुकरा देने के बाद गुरूवार को फ़िर पंचायत बैठी और गहलोत परिवारों को रविवार सुबह तक गांव छोड़ने का फतवा जारी कर दिया।
खाप ने इस संबंध में किसी भी प्रकार का पुनर्विचार न करने का निर्णय लेते हुए तीनों परिवारों को रविवार सुबह तक का अल्टीमेटम दिया है। ख़ास बात यह है कि जिला प्रशासन, पुलिस व कोई भी जनप्रतिनिधि पीडि़त परिवारों की मदद के लिए नहीं पहुंचा है। मानव अधिकार संगठन पूरे मामले पर चुप्पी साधे हैं।फैसले से गहलोत परिवार पूरी तरह सहमा हुआ है और प्रशासन व मुखयमंत्री से मदद की गुहार लगा रहा है।
उल्लेखनीय है कि गांव ढराणा में गोत्र विवाद को लेकर कादियान बारहा खाप ने रोहतास, उसके भाई नसीब व वेदप्रकाश तथा उनके पिता रिसाल सिंह को रोहतास के पुत्र रविंद्र का उसकी पत्नी शिल्पा से तलाक करवाने या फिर जमीन-जायदाद बेचकर गांव छोडऩे का फरमान सुनाया था। इसके बाद 15 जुलाई को गांव दूबलधन में खाप के प्रधान छत्र सिंह के घर पर हुई दोनों पक्षों की बैठक में गहलोत परिवार ने रविंद्र के तलाक पर सहमति जता दी थी। इसके बाद बृहस्पतिवार को रोहतास सहित गहलोत पक्ष व कादियान खाप से जुड़े लगभग पांच दर्जन व्यक्ति रविंद्र की ससुराल पानीपत जिले के गांव सिवाह पहुंचे और तलाक के फैसले से उसके ससुराल जनों को अवगत करवाया। रविंद्र के ससुराल जनों द्वारा तलाक से जब पूरी तरह इनकार कर दिया गया तो दोनों ही पक्ष सिवाह से सायं के समय सीधे बेरी की गोशाला में पहुंचे और वहां पर कादियान खाप से जुड़े लोगों ने अपना आखिरी फरमान सुनाते हुए इस संबंध में गहलोत परिवारों को जल्द से जल्द गांव छोडऩे का फरमान सुना दिया। जब पीडि़त परिवारों की ओर से यह दुहाई दी गई कि वे खुद अपनी ओर से तलाक के लिए तैयार हैं तो उसके बाद गोशाला में जमा चंद लोगों ने फैसला सुनाया कि तलाक का मामला खत्म हो चुका है और इस संबंध में सामाजिक बहिष्कार के साथ ही गांव छोडऩे के फैसले से कम पर कोई भी बात नहीं की जाएगी। इतना ही नहीं बहिष्कृत परिवारों के किसी भी सदस्य के साथ यदि खाप के गांवों से जुड़ा कोई भी व्यक्ति बातचीत करता हुआ पाया गया तो उसके सामाजिक बहिष्कार के अलावा 21 हजार रुपये का जुर्माना भी किया जाएगा।
फैसले से सहमे रोहतास व नसीब ने बताया कि पखवाड़े भर से चल रहे इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से भले ही उन्हें सुरक्षा मुहैया करवा दी गई हो लेकिन जिला प्रशासन का कोई अधिकारी व कोई भी जन प्रतिनिधि इस मामले में उनकी मदद करने के लिए आगे नहीं आ रहा है। उन्होंने इस मामले में उन्हें उजाडऩे के आरोप भी लगाए। उन्होंने बताया कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि ऐसी स्थिति में वे क्या करें। इससे पहले पानीपत के गांव सिवाह में गोत्र विवाद को लेकर हुई पंचायत बेनतीजा रही।
दंपति का तलाक लेने से इनकार
दूसरी ओर दंपति ने तलाक लेने से इनकार कर दिया। सिवाह में तीन घंटे चली पंचायत में दोनों ओर से अपने-अपने पक्ष रखे गए, लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। दंपति का कहना है कि वे तलाक नहीं लेंगे। रोहतास के पुत्र रविंद्र ने बताया कि वह और उसकी पत्नी शिल्पा दिल्ली के सुल्तानपुरी में अपनी बुआ के पास ठहरे हुए हैं। उसका गांव से कोई लेना-देना नहीं है। वह पत्नी शिल्पा को तलाक नहीं देंगे। पंचायत के फैसले के बारे में पूछे जाने पर रविंद्र ने कहा कि अगर तलाक के लिए दबाव पड़ा तो पुलिस की सहायता लूंगा। शिल्पा का कहना है कि वह पति रविंद्र के साथ रहेगी तथा पति से तलाक नहीं लेगी।

Sunday, January 25, 2009

Congress में सिर फुटौव्वल

कांग्रेस और आपसी फूट कोई नई बात नहीं है, लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की सिर फुटौव्वल परदे से बाहर दिखाई देने लगी है। इस बार यह लडाई ख़ुद मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र से सामने आई है। रोहतक के सांसद और सीएम के पुत्र दीपेंदर हुड्डा के सामने ही क्षेत्र के दो दिग्गज नेताओं के समर्थक भिड गए। बात समर्थकों तक रहती तो ठीक था, पर मामला तब बिगड़ गया जब नेता ही धक्का-मुक्की में शामिल हो गए।
हुआ यों दीपेन्द्र की बेरी में जनसभा चल रही थी और उनके साथ थे बेरी हलके के विधायक और विधानसभा के स्पीकर Raghubir Singh Kadiyan. उसी समय बदली हलके से कांग्रेस प्रत्याशी रहे चतर सिंह पहलवान भी समर्थकों सहित वहां पहुँच गए।
देखते ही देखते दोनों और से समर्थकों में नारेबाजी होने लगी और मामला हाथापाई तक पहुँच गया। और सूत्र यहाँ तक कहते हैं दोनों नेताओं में भी धक्कामुक्की हुई। हालाँकि कोई भी कांग्रेसी इस पर मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
सूत्र बताते हैं, नए परिसीमन के बाद चतर सिंह का गांव बेरी हलके में शामिल हो गया। अब चतर सिंह ने बेरी क्षेत्र में जोरदार अभियान चला रखा था और स्वयं को हुड्डा परिवार के करीब बताकर टिकट पर दावा जता रहे थे।
जबकि मौजूदा विधायक ख़ुद इस सीट पर सबसे बड़े दावेदार हैं। इसी वजह से दोनों नेताओं के समर्थक टकरा गए।

Wednesday, January 21, 2009

केंद्र में इच्छाशक्ति का अभाव : नायडू

केन्द्र सरकार में राजनैतिक इच्छा शक्ति का अभाव है। सरकार के मंत्री आतंकवाद को मजहब से जोड़कर समाज को बांटने का कार्य कर रहे है। यह आरोप भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष वैंकेया नायडू ने झज्जर के जहांआरा बाग स्टेडियम में आयोजित भाजपा-इनेलो की विजय संकल्प रैली में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने दावा किया कि केन्द्र में एनडीए सरकार आने पर आतंकवाद को खत्म करने के लिए पोटा जैसा कड़ा कानून बनाकर संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी दे दी जाएगी। नायडू ने कहा कि राजग सरकार में देश के सभी गांवों को सड़क से जोड़ने, राजमार्गो का निर्माण करने, रेल व हवाई सुविधाओं को बढ़ाने तथा संचार के क्षेत्र में क्रांति लाने के कार्य किए लेकिन कांग्रेस सरकार आने के साथ देश में जरूरी चीजों का अभाव होने के साथ महंगाई व भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने दावा किया कि राजग सरकार आने पर पहली प्राथमिकता किसानों की दशा सुधारने की होगी और किसानों को चार प्रतिशत की दर से कृषि ऋण देने के अलावा फसल बीमा योजना लागू की जाएगी। इनेलो मुखिया ओमप्रकाश चौटाला ने राज्य सरकार पर किसानों की दुश्मन व पूंजीवादियों की हितैषी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रापर्टी डीलरों की सरकार है, जिसके कार्यकाल में पूरे राज्य का विकास रुक गया है। उन्होंने अपनी सरकार में शुरू की गई अनेक परियोजनाओं को पूरा न करने के आरोप भी राज्य सरकार पर लगाए। उन्होंने बिजली प्लांटों की स्थापना पर कहा कि इन प्लांटों से पैदा होने वाली बिजली दिल्ली व एनटीपीसी को मिलेगी, जबकि राज्य सरकार इन प्लांटों से पैदा होने वाली बिजली का सब्जबाग दिखाकर दोबारा सत्ता हासिल करना चाहती है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष आत्मप्रकाश मनचंदा व इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने भी प्रदेश को नंबर वन बनाने के सरकार के दावे को खोखला करार दिया। भाजपा के प्रदेश महामंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि पूर्व राजग सरकार ने सैनिकों व शहीदों को जो सम्मान दिया गया था उसे वर्तमान यूपीए सरकार ने भुला दिया है और सरकार की धर्म व संस्कृति का अपमान करने व तुष्टिकरण की नीति के चलते आतंकवादियों का हौसला इस कदर बढ़ चुका है कि वे तीन दिन तक देश की आर्थिक राजधानी को बंधक बनाकर सैकड़ों लोगों की जान ले लेते है।