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Sunday, March 22, 2009

BPL का गेहूं डकार गए

दो डीएफएससी, दो एएफएसओ भ्रष्टाचार के मामले में फंसे

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के दो डीएफएससी, दो एएफएसओ, चार सब इंस्पेक्टर तथा सात डिपो होल्डरों पर विजिलेंस ने भ्रष्टाचार के मामले में शिकंजा कस लिया है। इन पर केरोसिन व बीपीएल परिवारों के हिस्से का गेहूं डकारने का आरोप है। विजिलेंस ने इन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। सिरसा में 2005-06 के दौरान खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने गलत तरीके से जिले में नौ लाख 96 हजार लीटर केरोसिन अतिरिक्त चहेते डिपो होल्डरों में बांटकर लाखों रुपये डकार लिए। मामला उस समय उजागर हुआ, जब कुछ डिपो होल्डरों ने अधिकारियों द्वारा निर्धारित रिश्वत राशि बढ़ाने पर विरोध शुरू कर दिया। असंतुष्ट डिपो होल्डरों ने राज्य चौकसी ब्यूरो को इस संबंध में शिकायत की। इसमें आरोप लगाया गया कि संबंधित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने केरोसिन के प्रत्येक ड्रम पर 150 रुपये, बीपीएल परिवारों के गेहूं पर प्रति क्विंटल 20 रुपये, चावल पर प्रति क्विंटल 25 रुपये के हिसाब से रिश्वत निर्धारित की है। साथ ही गैस एजेंसी संचालकों से 10 लाख रुपये प्रति माह रिश्र्वत वसूली जा रही है। राज्य चौकसी ब्यूरो के अधिकारियों ने इस संबंध में जांच पूरी कर आरोपी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार एजेंसी संचालकों से दस लाख रुपये प्रति माह वसूली के आरोप साबित नहीं हो पाए, लेकिन शेष आरोप सही पाए गए हैं। विजिलेंस जांच अधिकारी ने रिपोर्ट दी है कि वर्ष 2005-06 के दौरान सिरसा में तैनात दो डीएफएससी हंसराज भादू, आरती मैदान, दो एफएसओ महेंद्र कुमार व बलवंत सिंह, चार सब इंस्पेक्टर ओमकुमार, रामप्रकाश, जयभगवान, सुरेश आर्य और सात डिपो धारकों ने कालाबाजारी कर लाखों रुपये डकार लिए। इस संबंध में आरोपियों के खिलाफ धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 बी आईपीसी व 13(1) पीसी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। विजिलेंस ने चार सब इंस्पेक्टरों व सात डिपो होल्डरों पर भी शिकंजा कसा.

Monday, January 19, 2009

तीन जजों के तबादले की सिफारिश

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने न्यायाधीशों से जुडे़ भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए पंजाब एवं हरियाणा के न्यायाधीश निर्मल यादव समेत इलाहाबाद और उत्तराखंड उच्च न्यायालयों के भी एक-एक न्यायाधीशों के स्थानातंरण की सिफारिश की है। इस पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार करेगी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आर मिश्रा का हरियाणा उच्च न्यायालय में स्थानांतरण किया जा रहा है। इलाहाबाद तथा उत्तराखंड उच्च न्यायालयों के तीन अन्य न्यायाधीश भी किसी अन्य उच्च न्यायालय में भेजे जा रहे हैं। इन तीनों के तबादले की सिफारिश इसलिए की है ताकि गाजियाबाद जिला अदालत में सात करोड़ रुपये के जीपीएफ घोटाले के मामले की जांच प्रभावित न हो। हालांकि स्थानांतरण पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार करेगी। न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश निर्मल यादव के स्थानांतरण की भी सिफारिश की है। वह 15 लाख रुपये घूस के ऐसे मामले में कथित रूप से संलिप्त हैं जिसमें धोखे से यह राशि उनके बजाय एक अन्य महिला न्यायाधीश निर्मलजीत कौर के घर पर पहुँचा दी गई। न्यायमूर्ति बालाकृष्णन तीन न्यायाधीशों की जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर न्यायमूर्ति यादव को पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं। समिति ने न्यायमूर्ति यादव को न्यायिक कदाचार का दोषी पाया था। हालांकि न्यायमूर्ति यादव ने न्यायमूर्ति बालाकृष्णन को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि उच्चतम न्यायालय के ही एक न्यायाधीश इस मामले की जांच प्रभावित कर रहे हैं। उनका यह भी आरोप है कि जब हरियाणा के अतिरिक्त महाधिवक्ता संजीव बंसल के कर्मचारी अगस्त 2008 में 15 लाख रुपये लेकर न्यायमूर्ति कौर के घर पर पहुंचे थे तब उच्चतम न्यायालय के उक्त न्यायाधीश भी कथित रूप से उनके घर पर मौजूद थे।